4 सितंबर को जन्माष्टमी के दिन ठाकुरजी के 13 घंटे विशेष दर्शन होंगे। तड़के 4:00 बजे मंगला झांकी के साथ मंदिर के कपाट खुलेंगे, जिसके बाद रात 10:30 बजे तक भक्त अलग-अलग झांकियों के माध्यम से दर्शन कर सकेंगे। इसके पश्चात मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, तिथि पूजा और पंचामृत अभिषेक के भव्य आयोजन संपन्न होंगे।
सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस, मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं:
नो-व्हीकल जोन और पैदल मार्ग: मंदिर में प्रवेश से लेकर दर्शन के बाद निकास तक श्रद्धालुओं को करीब 5 से 6 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ सकता है।
सार्वजनिक परिवहन पर रोक: जन्माष्टमी पर परकोटे (चारदीवारी) क्षेत्र में ई-रिक्शा, ऑटो और अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट का संचालन बंद रहेगा।
मेट्रो के इस्तेमाल की अपील: प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे मंदिर आने के लिए मेट्रो या अन्य नजदीकी सार्वजनिक साधनों का ही इस्तेमाल करें।
भीड़ को सुचारू रूप से नियंत्रित करने के लिए प्रवेश के कड़े नियम बनाए गए हैं:
सिंगल एंट्री प्वाइंट: मंदिर में प्रवेश केवल जलेब चौक स्थित बांदरवाल गेट के निर्धारित मार्ग से ही दिया जाएगा। अन्य सभी रास्तों से प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा।
तीन अलग-अलग कतारें: जलेब चौक से श्रद्धालुओं के लिए 3 अलग-अलग लाइनें बनाई गई हैं— पहली पास वाले श्रद्धालुओं के लिए, दूसरी बिना जूते-चप्पल आने वालों के लिए और तीसरी जूते-चप्पल पहनकर आने वाले भक्तों के लिए।
मंदिर परिसर के भीतर जूते-चप्पल रखने की व्यवस्था नहीं होगी:
जूता स्टैंड व्यवस्था: जूते-चप्पल उतारने के लिए पुरानी विधानसभा के पास विशेष स्टैंड बनाया गया है।
प्रशासनिक अपील: भीड़ में देरी से बचने और व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए प्रशासन ने श्रद्धालुओं से संभव हो तो घर से बिना जूते-चप्पल पहनकर ही मंदिर आने का आग्रह किया है।