Crime

किशनगढ़ में चुनावी बैनर हटाते 18 वर्षीय युवक की करंट से मौत, हादसे के बाद परिजनों का हंगामा

अजमेर/किशनगढ़। राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में चुनावी प्रचार सामग्री हटाते समय एक दर्दनाक हादसा हो गया। बुधवार शाम वार्ड-42 में चुनावी बैनर हटाने के दौरान 18 वर्षीय युवक बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट लगने से युवक गंभीर रूप से झुलस गया। उसे तत्काल किशनगढ़ के राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल रेफर कर दिया गया। जेएलएन अस्पताल में उपचार के दौरान युवक की मौत हो गई।

युवक की मौत की सूचना मिलते ही मदनगंज थाना पुलिस देर शाम अजमेर पहुंची। इधर, पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू होने से पहले मृतक के परिजनों ने आपत्ति जताते हुए हंगामा कर दिया। परिजनों ने घटना की परिस्थितियों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की। काफी समझाइश के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन सूर्यास्त हो जाने के कारण बुधवार को पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका। गुरुवार सुबह पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई की गई।

चुनाव प्रचार थमने के बाद बैनर हटाने गया था युवक

पुलिस के अनुसार, किशनगढ़ नया शहर के गुर्जर मोहल्ला निवासी कुलदीप उर्फ वासु (18) पुत्र कालूराम गुर्जर बुधवार शाम करीब 5 बजे चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद वार्ड-42 में लगे चुनावी बैनर हटाने गया था।

इसी दौरान बैनर हटाते समय लोहे का पाइप ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार के संपर्क में आ गया। तार के संपर्क में आते ही युवक करंट की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से झुलस गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने उसे तत्काल राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल पहुंचाया।

युवक की हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे अजमेर के जेएलएन अस्पताल रेफर कर दिया। वहां डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो सका और इलाज के दौरान कुलदीप ने दम तोड़ दिया।

मौत की सूचना पर अजमेर पहुंची पुलिस

कुलदीप की मौत की सूचना मिलने के बाद मदनगंज थाना पुलिस देर शाम अजमेर पहुंची। पुलिस ने शव के पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की, लेकिन इससे पहले ही मृतक के परिजनों ने आपत्ति जताई।

परिजनों ने हंगामा करते हुए मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उनका कहना था कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसे चुनावी प्रचार सामग्री हटाने के लिए किसने भेजा, इसकी जांच होनी चाहिए।

हंगामे की सूचना मिलने पर मेडिकल फॉरेंसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरके माथुर, सदर कोतवाली थाने के सहायक उपनिरीक्षक सुखपाल सहित पुलिस जाप्ता मौके पर पहुंचा। पुलिस और अधिकारियों ने परिजनों से समझाइश की। काफी देर की बातचीत के बाद परिजन शांत हुए।

हालांकि, तब तक सूर्यास्त हो चुका था, जिसके चलते बुधवार को पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका। गुरुवार सुबह पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई की गई।

मामा ने उठाए सवाल- कुलदीप को किसने भेजा?

मृतक के मामा मुकेश गुर्जर ने घटना को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद बैनर और अन्य प्रचार सामग्री हटाने का काम नगर परिषद के कर्मचारियों द्वारा भी किया जा सकता था। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि कुलदीप को बैनर हटाने के लिए किसने भेजा था।

मामा के अनुसार, भाजपा प्रत्याशी की ओर से कुलदीप को बैनर हटाने के लिए भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की जांच और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

उन्होंने कहा कि परिवार यह जानना चाहता है कि कुलदीप पोल पर या बैनर हटाने के दौरान किस वजह से गया, उसे वहां किसने भेजा और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

प्रत्याशी भी मौके पर पहुंचा, आश्वासन देने की बात

परिजनों के अनुसार, संबंधित पार्षद प्रत्याशी भी मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने परिवार को समझाने और मामले में सहयोग का आश्वासन दिया। इसके बाद वे वहां से चले गए।

परिवार का कहना है कि महज आश्वासन से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। घटना की पूरी परिस्थितियों की जांच होनी चाहिए और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

किशनगढ़ में ही पोस्टमॉर्टम की मांग

परिजन शव को वापस किशनगढ़ ले जाकर वहीं पोस्टमॉर्टम करवाने की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि हादसा किशनगढ़ में हुआ है, इसलिए पोस्टमॉर्टम भी किशनगढ़ में ही कराया जाना चाहिए।

हालांकि, पुलिस की मौजूदगी में गुरुवार सुबह अजमेर में पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई कराई गई। अब पुलिस घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह भी सामने आने की संभावना है कि युवक को प्रचार सामग्री हटाने का काम किसने सौंपा था और मौके पर बिजली के तारों के संबंध में क्या सुरक्षा व्यवस्था थी।

किशनगढ़ में चुनावी प्रचार समाप्त होने के बाद हुई इस घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ चुनावी प्रचार सामग्री हटाने की प्रक्रिया चल रही थी, वहीं दूसरी ओर बिजली के तारों के संपर्क में आने से एक युवा की जान चली गई। अब परिवार को जांच के जरिए यह उम्मीद है कि हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी और यदि किसी की लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदारी तय की जाएगी।