बीकानेर जिले की जिम्मेदारी डॉ. नरेन्द्र चौधरी को सौंपी गई है, जबकि जयपुर जिले के लिए कानाराम मीना को प्रभारी बनाया गया है। स्कूल शिक्षा एवं भाषा, पुस्तकालय तथा पंचायतीराज (प्रारंभिक शिक्षा) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव के आदेश के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है।
जिला प्रभारी के प्रत्येक दौरे में कम से कम दो पीएम श्री और दो आवासीय विद्यालयों का निरीक्षण करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा जिले के अन्य सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान पेयजल व्यवस्था, छात्र-छात्राओं के लिए अलग और क्रियाशील शौचालय, स्कूल भवन की स्थिति और शैक्षणिक वातावरण प्रमुख जांच बिंदु होंगे। पीएम श्री और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में स्वीकृत क्षमता की तुलना में वास्तविक नामांकन की स्थिति भी जांची जाएगी।
असुरक्षित और जर्जर घोषित स्कूल भवनों तथा कमरों को लेकर निरीक्षण में विशेष सतर्कता बरती जाएगी। ऐसे भवन या कमरों में तत्काल ताला लगाने और दरवाजे पर लाल रंग से ‘X’ का निशान लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर संबंधित भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा के साथ सीसीटीवी कैमरे, भवन और शौचालयों की स्थिति भी जांची जाएगी।
स्कूल परिसरों में संचालित सह-स्थित आंगनवाड़ी केंद्रों के भवनों की सुरक्षा को भी निरीक्षण के एजेंडे में शामिल किया गया है।
जिला प्रभारी ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान के तहत स्कूल परिसरों में पौधरोपण और हरियाली की स्थिति की समीक्षा करेंगे। जिन सरकारी स्कूलों के पास भूमि का पट्टा नहीं है, वहां पट्टा दिलाने की कार्रवाई की प्रगति भी जांची जाएगी।
इसके अलावा स्कूल परिसरों में पड़ी अनुपयोगी सामग्री और कबाड़ के नियमानुसार नीलामी या निस्तारण की स्थिति भी देखी जाएगी। विभाग की ओर से शिक्षकों के नवाचारों को प्रोत्साहित करने के साथ चित्रकला, निबंध सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं की गतिविधियों को पोर्टल पर फोटो और वीडियो के साथ अपलोड कराने पर भी निगरानी रखी जाएगी।
स्कूलों के निरीक्षण का फोकस केवल भवन और सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा। अधिकारियों को यह भी जांचना होगा कि उपलब्ध संसाधनों का विद्यार्थियों की पढ़ाई पर कितना असर पड़ रहा है और बच्चों का वास्तविक सीखने का स्तर क्या है।
विभाग ने जिला प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण के दौरान ऐसी समस्याएं सामने आने पर, जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर संभव है, उन्हें लंबित नहीं रखा जाए। संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर समस्या का मौके पर ही समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
इस नई व्यवस्था से शिक्षा विभाग का फोकस स्कूलों की जमीनी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी के साथ-साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा और सीखने के स्तर पर भी रहेगा।