जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर एक बार फिर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मुद्दे को लेकर छात्र संगठनों में भारी रोष है, जिसके चलते आने वाले दिनों में परिसर का माहौल गरमाने के आसार हैं।
छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है।
न्यायालय का निर्देश: रेवाड़ के अनुसार, न्यायपालिका ने 19 जनवरी को इस विषय पर बैठक आयोजित करने और मार्च से पहले चुनाव कैलेंडर जारी करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
प्रशासन का रुख: छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट के इन आदेशों का पालन नहीं किया और प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
छात्रों ने बताया कि प्रशासन की इस कार्यप्रणाली के खिलाफ वे पुनः न्यायालय की शरण में गए हैं।
विधिक कार्रवाई: कोर्ट ने आदेशों की अवहेलना के मामले को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) के खिलाफ नोटिस जारी किया है।
छात्रों का सवाल: शुभम रेवाड़ ने सवाल उठाया कि "जब उच्च न्यायालय के आदेशों को ही नजरअंदाज किया जा रहा है, तो आम छात्रों की समस्याओं को प्रशासन कैसे सुनेगा?"
छात्रों ने इस मुद्दे को केवल चुनाव तक सीमित न मानकर इसे 'छात्र लोकतंत्र' की रक्षा का मुद्दा बताया है।
फीस और अधिकार: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय छात्रों की फीस से चलता है, इसलिए उनकी लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अंतिम संघर्ष: शुभम रेवाड़ ने घोषणा की कि यह संघर्ष अब अपने अंतिम चरण में है और छात्र अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ते तनाव के बीच छात्रों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं किए गए, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
रणनीति: छात्र संगठन अब विभिन्न विभागों में जाकर विद्यार्थियों को एकजुट कर रहे हैं ताकि प्रशासन पर दबाव बनाया जा सके।