बीकानेर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म के लिए मिलने वाली राशि का इंतजार कई बच्चों के लिए लंबा हो गया है। राज्य सरकार की ओर से यूनिफॉर्म की राशि सीधे बैंक खातों में भेजने के लिए DBT प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन करीब 35 फीसदी विद्यार्थियों के बैंक खाते अभी तक जनाधार से अधिप्रमाणित नहीं होने के कारण भुगतान अटक गया है।
शालादर्पण पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब 65 प्रतिशत विद्यार्थियों के बैंक खाते जनाधार से अधिप्रमाणित हो चुके हैं। वहीं करीब 35 प्रतिशत विद्यार्थियों के स्तर पर अभी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। अधिप्रमाणीकरण नहीं होने की स्थिति में संबंधित विद्यार्थियों की DBT प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
राज्य स्तर पर 29 जुलाई को मुख्यमंत्री की ओर से सिंगल क्लिक के माध्यम से यूनिफॉर्म DBT योजना की शुरुआत की गई थी। इसके बाद अब तक 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। हालांकि, बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की DBT अभी विभिन्न कारणों से लंबित है।
समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्य योजना एवं बजट 2026-27 में कक्षा 1 से 8 तक के कुल 40 लाख 65 हजार 52 पात्र विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म DBT मद में 24,390.312 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पीएमश्री योजना के तहत 90 हजार 896 विद्यार्थियों के लिए 545.376 लाख रुपए की राशि का प्रावधान किया गया है।
संबंधित राशि जिला और ब्लॉक स्तर पर स्थानांतरित की जा चुकी है। अब विभाग का फोकस पात्र विद्यार्थियों के खातों में राशि पहुंचाने के लिए जरूरी तकनीकी और दस्तावेजी कमियों को दूर करने पर है।
यूनिफॉर्म DBT अटकने का सबसे बड़ा कारण जनाधार अधिप्रमाणीकरण नहीं होना बताया जा रहा है। कई विद्यार्थियों के अभिभावकों का जनाधार कार्ड अभी बना ही नहीं है। वहीं कुछ मामलों में जनाधार में नाम, जन्मतिथि या अन्य जरूरी जानकारी अपडेट नहीं है।
ऐसी स्थिति में विद्यार्थी पात्र होने के बावजूद DBT प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। विभाग के सामने चुनौती यह है कि इन विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के जनाधार संबंधी रिकॉर्ड को जल्द से जल्द दुरुस्त कराया जाए, ताकि यूनिफॉर्म की राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचाई जा सके।
केवल जनाधार अधिप्रमाणीकरण की समस्या ही नहीं है। जिन विद्यार्थियों के बैंक खाते जनाधार से अधिप्रमाणित हो चुके हैं, उनमें भी कुछ मामलों में भुगतान की समस्या सामने आ रही है।
कई बैंक खाते निष्क्रिय हैं, जबकि कुछ विद्यार्थियों के रिकॉर्ड में गलत IFSC कोड दर्ज होने के कारण DBT ट्रांजेक्शन आगे नहीं बढ़ पा रहा है। ऐसे मामलों में बैंक खाते की स्थिति जांचने और गलत बैंक संबंधी जानकारी को ठीक कराने की जरूरत है।
समस्या के समाधान के लिए राज्य स्तर से जिलों को निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा ने शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर सभी जिलों के एडीपीसी, जिला शिक्षा अधिकारी और सीबीईओ कार्यालयों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने को कहा है।
अधिकारियों से कहा गया है कि पात्र विद्यार्थियों के जनाधार का अधिक से अधिक अधिप्रमाणीकरण कराया जाए। इसके साथ ही बैंक खातों की स्थिति और IFSC कोड से संबंधित कमियों को भी दूर कराया जाए।
विभाग ने इन सभी कमियों के निराकरण के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। स्कूल स्तर पर भी ऐसे विद्यार्थियों की जानकारी जुटाकर संबंधित परिवारों से आवश्यक दस्तावेज और बैंक संबंधी जानकारी अपडेट कराने की प्रक्रिया तेज की जा सकती है।
सरकार की योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म के लिए मिलने वाली राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाना है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे और लाभार्थियों को समय पर सहायता मिल सके। लेकिन जनाधार अधिप्रमाणीकरण, बैंक खाते की निष्क्रियता और गलत IFSC जैसी तकनीकी कमियों के कारण बड़ी संख्या में पात्र विद्यार्थी अभी इस लाभ से वंचित हैं।
अब विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती करीब 35 फीसदी लंबित खातों की कमियां दूर कर DBT प्रक्रिया पूरी कराने की है। यदि जनाधार और बैंक रिकॉर्ड जल्द दुरुस्त होते हैं तो आने वाले समय में लंबित विद्यार्थियों के खातों में भी यूनिफॉर्म की राशि पहुंचने की उम्मीद है।