रामपुरा-कंवरपुरा के सरकारी स्कूल में निरीक्षण के लिए पहुंची CJP की टीम का ग्रामीणों ने विरोध किया था। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद और कथित मारपीट की बात सामने आई। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया था कि उनकी टीम के साथ मारपीट की गई, वाहनों में तोड़फोड़ की गई और महिला कार्यकर्ताओं के साथ भी बदसलूकी हुई।
रांका ने घटना के बाद कार्रवाई की मांग करते हुए सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी थी।
विवाद के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए।
दिलावर ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े लोग स्कूलों में जाकर अनावश्यक रूप से माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल बच्चों के भविष्य निर्माण के लिए पवित्र परिसर हैं, जहां राजनीति के बजाय शिक्षा, संस्कार और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
मंत्री ने शिक्षकों, अभिभावकों और आमजन से भी ऐसे प्रयासों से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि निहित स्वार्थ और क्षणिक वाहवाही के लिए स्कूलों का माहौल खराब करने की कोशिशों से सभी को सतर्क रहना चाहिए।
मदन दिलावर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आशुतोष रांका ने बेहद आक्रामक भाषा में पलटवार किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उन्हें नाकाम और भ्रष्ट बताया। रांका ने दावा किया कि शिक्षा मंत्री में शिक्षा के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने का साहस नहीं है।
रांका ने स्कूलों की जर्जर स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि बच्चों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और वे खराब परिस्थितियों में पढ़ने को मजबूर हैं, तो सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।
रांका ने मदन दिलावर को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि उनका समय अब खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि जितनी राजनीति करनी है कर लें, लेकिन CJP स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी।
रांका के बयान के बाद विवाद ने नया राजनीतिक रूप ले लिया है। अब मामला केवल रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल के निरीक्षण और वहां हुए विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, सरकारी स्कूलों की स्थिति और स्कूल परिसरों में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भाजपा सरकार और CJP के बीच टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है।