जयपुर: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब छात्र और शिक्षक फिर से पासबुक की मदद से पढ़ाई और अध्यापन कर सकेंगे। राज्य सरकार ने स्कूलों में पासबुक के उपयोग पर लगे लंबे समय के प्रतिबंध को वापस ले लिया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा सोमवार, 20 अप्रैल को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।
माध्यमिक शिक्षा राजस्थान के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डॉ. रामगोपाल शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विभाग ने पूर्व में जारी उन दो आदेशों को वापस (प्रत्याहरित) ले लिया है जिनके तहत पासबुक पर रोक लगाई गई थी।
कार्रवाई का डर खत्म: अब किसी छात्र या शिक्षक के पास पासबुक पाए जाने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।
सरकारी स्कूलों में पासबुक पर रोक लगाने के पीछे विभाग का तर्क रटंत प्रणाली को रोकना था।
पहला आदेश: 13 मार्च 2018 को माध्यमिक शिक्षा परिषद ने यह कहते हुए रोक लगाई थी कि पासबुक के कारण छात्र मूल पुस्तकों से अध्ययन नहीं करते और केवल रटने पर ध्यान देते हैं।
दूसरा आदेश: 6 नवंबर 2023 को तत्कालीन निदेशक कानाराम ने इसी प्रतिबंध को दोहराते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
शिक्षा विभाग के इस फैसले को निजी प्रकाशक ‘संजीव पासबुक’ ने राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच में चुनौती दी थी। याचिका में दलील दी गई कि पासबुक सहायक सामग्री के रूप में उपयोग की जाती है और इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना तर्कसंगत नहीं है।
हाईकोर्ट का स्टे: मामले की सुनवाई के बाद 12 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेश पर रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट के स्टे के बाद राज्य सरकार के पास ऊपरी अदालत में अपील करने का विकल्प खुला था, लेकिन सरकार ने कानूनी राय मशविरे के बाद आगे अपील नहीं करने का निर्णय लिया।
विधिक निर्देश: 17 मार्च 2026 को संयुक्त विधि परामर्शी ऋतु शर्मा ने आदेश जारी कर विभाग को प्रतिबंध वापस लेने के निर्देश दिए। सरकार के इस रुख के बाद अब 2018 और 2023 के दोनों आदेश शून्य हो गए हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से दूर-दराज के क्षेत्रों में पढ़ रहे उन छात्रों को राहत मिलेगी जो कठिन विषयों को समझने के लिए सहायक सामग्री (पासबुक) का उपयोग करते हैं। शिक्षकों के लिए भी अब यह स्पष्ट हो गया है कि वे पासबुक का उपयोग संदर्भ के तौर पर कर सकते हैं।