एसीबी के अनुसार, रिश्वत की रकम लेने के लिए दलालों के संपर्क में रहने के दौरान सांवल राम सोमवार को उदयपुर से झालावाड़ चला गया था। वह रात में झालावाड़ में रुका। अगले दिन मंगलवार को जब वह उदयपुर लौट रहा था, तब उसकी लोकेशन सुकेत में मिली।
एसीबी टीम ने पहले मामले में शामिल दलाल को पकड़ा। इसके बाद मुख्यालय से भेजी गई फोटो के आधार पर सांवल राम की पहचान की गई और टीम ने उसे सुकेत में गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने उदयपुर स्थित सांवल राम के आवास की तलाशी ली। तलाशी के दौरान 17 लाख रुपए नकद बरामद किए गए। इसके अलावा करीब 17 लाख रुपए कीमत के सोने के जेवर और लगभग 75 हजार रुपए के चांदी के आभूषण भी मिलने की बात सामने आई है।
एसीबी अब बरामद नकदी और जेवरों के स्रोत के संबंध में भी जांच कर रही है।
25 लाख रुपए की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार सीजीएसटी अधीक्षक सांवल राम और दोनों कथित दलाल अनिल पारीक और सुशील पारीक को एसीबी ने बुधवार देर शाम अदालत में पेश किया। न्यायालय ने तीनों आरोपियों को 14 अक्टूबर तक न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।
इससे पहले एसीबी ने जीएसटी अधीक्षक और दलाल अनिल पारीक को आमने-सामने बैठाकर रिश्वत की बातचीत और पूरे घटनाक्रम को लेकर पूछताछ की। अधिकारियों ने दिनभर आरोपियों से मामले से जुड़े तथ्यों के बारे में जानकारी जुटाई।
मामले में परिवादी ने एसीबी को एक और गंभीर जानकारी दी है। उसके अनुसार, जीएसटी अधिकारी कथित तौर पर इससे पहले भी दलाल के जरिए 60 लाख रुपए ले चुका है। एसीबी अब इस दावे की भी जांच करेगी।
एसीबी ने परिवादी से 60 लाख रुपए के कथित लेन-देन से संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मांगे हैं। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि यदि रकम का लेन-देन हुआ था तो उसमें किन लोगों की भूमिका थी।
परिवादी के मुताबिक, उसकी दो रजिस्टर्ड फर्म हैं। आरोप है कि एक फर्म की रिकवरी राशि जारी नहीं करने, शो-कॉज नोटिस और सम्मन के निस्तारण तथा दूसरी फर्म का जीएसटी खाता एक्टिव करने के बदले अधिकारी ने दलालों के माध्यम से रकम की मांग की थी।
परिवादी का आरोप है कि पहली किश्त के तौर पर 25 लाख रुपए देने के लिए उस पर दबाव बनाया जा रहा था। इसी शिकायत के आधार पर एसीबी ने कार्रवाई की और अब पूरे मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।