Rajasthan

अशोक गहलोत का बड़ा दावा: निकाय चुनाव में भाजपा की करारी हार तय

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों की सरगर्मियों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार पर तीखा हमला बोला है। निकाय चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले गहलोत ने दावा किया कि प्रदेश में भाजपा के खिलाफ जबरदस्त माहौल है और पार्टी को चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए भाजपा सरकार की कार्यशैली, किसानों की समस्याओं और गौशालाओं की स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए।

अशोक गहलोत ने कहा कि भाजपा के नेताओं और मंत्रियों की गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि पार्टी चुनावी हार को लेकर चिंतित है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर समेत कई क्षेत्रों में आयोजित रोड शो जनता को प्रभावित करने में विफल रहे हैं। गहलोत ने कहा कि पार्षद चुनावों में भाजपा के कुछ नेता और जनप्रतिनिधि मतदाताओं को यह कहकर डराने का प्रयास कर रहे हैं कि यदि भाजपा प्रत्याशी नहीं जीते तो वार्डों का विकास नहीं होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा के बागी उम्मीदवारों और उनके समर्थकों पर दबाव बनाने के लिए सरकारी एजेंसियों का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर बागी उम्मीदवारों के प्रतिष्ठानों पर जीएसटी की कार्रवाई और सीलिंग जैसी घटनाएं सामने आई हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। गहलोत का कहना है कि यह सब भाजपा की चुनावी घबराहट को दर्शाता है।

उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में आज तक किसी सत्ताधारी दल के खिलाफ इतना व्यापक जनाक्रोश देखने को नहीं मिला। उनके अनुसार, भाजपा सरकार के ढाई वर्षों के कार्यकाल से जनता निराश और परेशान है। गहलोत ने कहा कि 9 और 11 सितंबर को होने वाले निकाय चुनावों में मतदाता बड़ी संख्या में मतदान करेंगे और भाजपा को स्पष्ट संदेश देंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस को इन चुनावों में व्यापक समर्थन मिलेगा और भाजपा की हार तय है।

किसानों के मुद्दे पर भी गहलोत ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार, किसानों के सामने दो ही विकल्प बचे हैं—या तो उनकी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी नहीं जाती, और यदि खरीद हो भी जाए तो भुगतान समय पर नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ से लेकर झालावाड़ तक किसानों को अपनी उपज बेचने और भुगतान प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

गहलोत ने याद दिलाया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एमएसपी गारंटी कानून लागू करने का वादा किया था, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने किसानों को भ्रमित कर सत्ता हासिल की, लेकिन अब किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पूछा कि किसानों का बकाया भुगतान आखिर कब किया जाएगा।

गौशालाओं और गोवंश के मुद्दे पर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि गाय के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा सरकार गौसेवा के मामले में पूरी तरह विफल साबित हुई है। गहलोत के अनुसार, प्रदेश की हजारों गौशालाओं में लाखों गोवंश मौजूद हैं, लेकिन उन्हें लंबे समय से अनुदान नहीं मिला है। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों रुपये का अनुदान फाइलों में अटका हुआ है, जबकि गौशाला संचालक कर्ज लेकर और समाजसेवियों की मदद से किसी तरह व्यवस्था चला रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सड़कों पर घूमते बेसहारा गोवंश सरकार की नीतियों की वास्तविक तस्वीर पेश करते हैं। गहलोत का आरोप है कि भाजपा केवल प्रचार और विज्ञापनों में गौभक्ति दिखाती है, लेकिन वास्तविक गौसेवा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में पीछे हट जाती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में यदि सूखे जैसी स्थिति बनती है तो गोवंश और किसानों दोनों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

निकाय चुनाव से पहले अशोक गहलोत के इन बयानों ने राजस्थान की राजनीति को और गर्मा दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में चुनावी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। अब सबकी नजर मतदान और उसके बाद आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हुई है, जो प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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