हनुमानगढ़। नगर परिषद सभापति चुनाव से पहले हनुमानगढ़ में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल से जुड़े जमीन खरीद में कथित गड़बड़ी और धोखाधड़ी के मामले में हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। एफआईआर में विधायक की पत्नी संतोष बंसल, नगर परिषद के तत्कालीन आयुक्त भंवरलाल सोनी सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने दोनों मामलों में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पहला मामला आवंटी राजरानी पत्नी मुलकराज से संबंधित जमीन को लेकर दर्ज कराया गया है। शिकायत में जमीन खरीद और उससे जुड़े दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी व धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं।
वहीं दूसरी एफआईआर आवंटी कृष्णा रानी पत्नी ओमप्रकाश से संबंधित जमीन के मामले में दर्ज हुई है। दोनों मामलों में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले में नामजद लोगों की भूमिका जांच का विषय बनी हुई है। आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
एफआईआर ऐसे समय दर्ज हुई हैं, जब हनुमानगढ़ नगर परिषद में सभापति पद के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही है। नगर परिषद के 60 वार्डों में से करीब 35 पार्षदों के विधायक गणेशराज बंसल गुट से जुड़े होने की बात कही जा रही है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले दर्ज हुए मामलों ने स्थानीय राजनीति में चर्चाओं को बढ़ा दिया है।
एफआईआर की टाइमिंग को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग चर्चाएं हैं। हालांकि, किसी राजनीतिक कारण से मामले दर्ज किए गए हैं या नहीं, इस संबंध में कोई निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले निकालना उचित नहीं होगा।
हनुमानगढ़ नगर परिषद सभापति पद के लिए शुरुआत में चार उम्मीदवारों की ओर से छह नामांकन दाखिल किए गए थे। जांच के बाद डमी फॉर्म निरस्त होने से मुकाबले में चार उम्मीदवार बचे हैं। इनमें से एक नामांकन वापस लिए जाने की संभावना है। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुकाबला तीन प्रमुख उम्मीदवारों के बीच रहने की संभावना है।
निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल गुट से मंजू रणवा, भाजपा से विनीता बत्रा और कांग्रेस से सुशीला खींचड़ प्रमुख दावेदार हैं। वहीं सुमित रणवा की पुत्रवधू तन्वी बनीवाल ने भी निर्दलीय विधायक गुट की ओर से नामांकन दाखिल किया है। उनका नामांकन वापस लिए जाने की चर्चा है।
सभापति पद के लिए 21 सितंबर को मतदान होना है। इससे पहले प्रमुख राजनीतिक खेमों ने अपने-अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी कर रखी है। निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल अपने पक्ष में 36 पार्षदों के समर्थन का दावा कर चुके हैं।
नगर परिषद में कांग्रेस के 10 पार्षद जीते हैं, जिनमें से एक के बंसल गुट के साथ होने की चर्चा है। वहीं भाजपा के 15 पार्षदों के एकजुट होने की बात सामने आ रही है। समर्थन को लेकर अलग-अलग दावों के बीच तीनों खेमों को क्रॉस वोटिंग की आशंका बनी हुई है।
सभापति चुनाव के साथ ही उपसभापति पद को लेकर भी राजनीतिक खेमों में मंथन जारी है। सूत्रों के अनुसार अलग-अलग गुट संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, उपसभापति पद की तस्वीर सभापति चुनाव के परिणाम के बाद ही स्पष्ट होने की संभावना है।
साल 2019 के नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस के 36, भाजपा के 18 और निर्दलीय 6 पार्षद चुने गए थे। एक निर्दलीय पार्षद ने भाजपा को समर्थन दिया था। सभापति चुनाव में भाजपा ने मनोज कुमार बंसल को उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस ने वर्तमान विधायक गणेशराज बंसल को मैदान में उतारा था। गणेशराज बंसल को 41 वोट मिले थे।
उपसभापति चुनाव में भाजपा समर्थित असलम अली टाक और कांग्रेस के अनिल खींचड़ के बीच मुकाबला हुआ था। क्रॉस वोटिंग के बाद अनिल खींचड़ उपसभापति निर्वाचित हुए थे। इस बार भी पार्षदों के समर्थन और क्रॉस वोटिंग की संभावना के चलते चुनाव पर सभी की नजरें हैं।