राज्य सरकार की ओर से इस अभियान को केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रखने, बल्कि लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनके पालन-पोषण पर भी जोर दिया जा रहा है। अभियान को ‘एक पेड़ मां के नाम’ से जोड़ा गया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी और भावनात्मक जुड़ाव के साथ आगे बढ़ाया जा सके।
10 करोड़ पौधों का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा होने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को जनभागीदारी का परिणाम बताते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियानों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण संरक्षण के आह्वान और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से प्रेरणा लेकर राजस्थान में हरियालो राजस्थान को व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है। उनका कहना है कि पौधरोपण केवल पर्यावरण बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और हरित भविष्य तैयार करने की जिम्मेदारी भी है।
राजस्थान सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महाअभियान के माध्यम से हर परिवार को जोड़ते हुए 10 करोड़ पौधे लगाने और उनका पालन-पोषण करने का लक्ष्य रखा था। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए ‘हरियालो राजस्थान’ मिशन को मल्टी-सेक्टरल कार्यक्रम के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
अभियान में सरकारी विभागों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, संस्थाओं और आम नागरिकों की भागीदारी पर जोर दिया गया है। सरकार की ओर से पौधरोपण की गतिविधियों की डिजिटल निगरानी और जियो-टैगिंग जैसी व्यवस्थाओं का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
आधिकारिक पोर्टल पर अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण के साथ डिजिटल मॉनिटरिंग, जियो-टैगिंग और जनभागीदारी को शामिल किया गया है।
हरियालो राजस्थान अभियान को ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल से जोड़कर लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल के जरिए पौधे को केवल पर्यावरणीय संसाधन के तौर पर नहीं, बल्कि परिवार और भावनाओं से जोड़ने की कोशिश की गई।
राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर वर्ष 2026-27 के लिए इस अभियान के तहत अलग-अलग अवसरों पर विशेष पौधरोपण गतिविधियां भी दर्ज हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर 28 अगस्त से 3 सितंबर 2026 तक ‘एक पेड़ भाई-बहन के नाम’ विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें लोगों से पौधे लगाने और उन्हें रक्षासूत्र बांधने की अपील की गई।
इस तरह सरकार ने त्योहारों और सामाजिक अवसरों को भी पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल भी सुनिश्चित की जाए। सरकार का जोर इस बात पर है कि पौधरोपण के बाद पौधे सुरक्षित रहें और उनका विकास हो।
राजस्थान जैसे बड़े भौगोलिक क्षेत्र और विविध जलवायु वाले राज्य में पौधों का संरक्षण एक बड़ी चुनौती है। गर्मी, कम वर्षा वाले क्षेत्र और पानी की उपलब्धता जैसे कारक पौधों के विकास को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में केवल पौधों की संख्या बढ़ाने के बजाय उनके जीवित रहने और विकसित होने पर ध्यान देना अभियान की दीर्घकालिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हरियालो राजस्थान पोर्टल पर पौधों की देखभाल को लेकर भी सुझाव उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें राजस्थान की परिस्थितियों के अनुरूप पौधों की देखभाल और बागवानी से जुड़े उपाय बताए गए हैं।
अभियान के लिए पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नर्सरियों का नेटवर्क भी विकसित किया गया है। सरकारी पोर्टल के अनुसार VB-G RAM G के तहत 11,004 स्वीकृत नर्सरियां दर्ज हैं और करीब 3.55 करोड़ पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जबकि उपलब्ध पौधों की संख्या करीब 1.27 करोड़ बताई गई है।
सरकार का लक्ष्य स्थानीय स्तर पर पौधे उपलब्ध कराकर नागरिकों और संस्थाओं को पौधरोपण के लिए प्रोत्साहित करना है। आधिकारिक पोर्टल पर यह भी बताया गया है कि राज्यभर में नर्सरियों के माध्यम से नागरिकों को पौधे उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
राजस्थान में बड़े पैमाने पर पौधरोपण का यह अभियान नया नहीं है। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बताया गया था कि वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक ‘मिशन हरियालो राजस्थान’ के तहत 10 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 11.64 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके थे। सर्वेक्षण में यह भी दर्ज है कि दिसंबर 2025 तक ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत राजस्थान में 8.21 करोड़ पौधे लगाए जाने की जानकारी मेरी लाइफ पोर्टल के अनुसार दर्ज थी।
इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार ने पौधरोपण अभियान को लगातार आगे बढ़ाने की योजना बनाई है। वर्ष 2026-27 में भी 10 करोड़ पौधों का लक्ष्य रखा गया और अब इसे निर्धारित समय से पहले पूरा करने की उपलब्धि सामने आई है।
10 करोड़ पौधों का लक्ष्य पूरा होना राजस्थान में बड़े पैमाने पर पौधरोपण की क्षमता और जनभागीदारी को दर्शाता है। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए पौधरोपण के बाद पौधों की जीवित रहने की दर, उनकी देखभाल, स्थानीय प्रजातियों का चयन और पानी की उपलब्धता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण होते हैं।
राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां अलग हैं। ऐसे में पौधरोपण के दीर्घकालिक परिणाम इस बात पर भी निर्भर करेंगे कि लगाए गए पौधों का संरक्षण किस तरह किया जाता है और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल संसाधन मिलते हैं।
राज्य सरकार का आधिकारिक अभियान भी पौधे लगाने के साथ उन्हें ‘पालने’ पर जोर देता है। ऐसे में अब 10 करोड़ का लक्ष्य पूरा होने के बाद अभियान के अगले चरण में पौधों की निगरानी और संरक्षण पर फोकस महत्वपूर्ण रहेगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ के संकल्प को आगे बढ़ाने और अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की है। साथ ही उन्होंने रोपे गए प्रत्येक पौधे की नियमित देखभाल करने का आह्वान किया है।
राजस्थान सरकार की योजना के अनुसार हरियालो राजस्थान को लगातार चलने वाले जनअभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाना है। 10 करोड़ पौधों का लक्ष्य समय से पहले पूरा होने के बाद अब अभियान के सामने अगली चुनौती लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखने और उन्हें विकसित करने की है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल राजस्थान में पौधों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में राज्य के हरित क्षेत्र को मजबूत करना और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना है। 10 करोड़ पौधों का आंकड़ा पार करना इसी दिशा में एक बड़ा पड़ाव माना जा रहा है।