जयपुर में भाजपा के सुनील कोठारी ने कांग्रेस की सुनीता मावर को 89-60 से हराया। कोटा में भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी ने कांग्रेस की सुनीता सुमन को 65-35 से मात दी। वहीं जोधपुर में भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता ने कांग्रेस के राजेंद्र सोलंकी को 53-47 से हराकर महापौर पद हासिल किया।
इससे पहले 21 सितंबर को अजमेर, अलवर, पाली और उदयपुर में मतदान के जरिए महापौर चुने गए थे, जबकि भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए थे। सात निगमों के पहले चरण के परिणाम में भाजपा ने छह और कांग्रेस ने एक महापौर पद जीता था।
| नगर निगम | विजेता | पार्टी | वोट | निकटतम प्रतिद्वंद्वी | वोट |
|---|---|---|---|---|---|
| जयपुर | सुनील कोठारी | भाजपा | 89 | सुनीता मावर | 60 |
| जोधपुर | प्रसन्नचंद मेहता | भाजपा | 53 | राजेंद्र सोलंकी | 47 |
| कोटा | अनुसुईया गोस्वामी | भाजपा | 65 | सुनीता सुमन | 35 |
| बीकानेर | अनिल कल्ला | कांग्रेस | 50 | सुरेंद्र सिंह शेखावत | 30 |
| अजमेर | अनामिका शर्मा | भाजपा | 43 | किरण गढ़वाल | 37 |
| उदयपुर | पारस सिंघवी | भाजपा | 55 | पूनम कुंवर राठौड़ | 25 |
| अलवर | सुमनलता अग्रवाल | भाजपा | 42 | कमलेश शर्मा | 23 |
| पाली | नमिता बुबकिया | भाजपा | 33 | राजबाला हिंगड़ | 29 |
| भरतपुर | अनुराधा सिंह | भाजपा | निर्विरोध | — | — |
| भीलवाड़ा | जसवंत कंवर | भाजपा | निर्विरोध | — | — |
जयपुर नगर निगम के महापौर चुनाव में भाजपा के सुनील कोठारी को 89 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की सुनीता मावर को 60 वोट प्राप्त हुए। इस तरह कोठारी ने 29 वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
जयपुर नगर निगम में कुल 150 पार्षद हैं। चुनाव से पहले भाजपा के 78, कांग्रेस के 57 और निर्दलीय पार्षदों की संख्या 15 थी। चुनाव के बाद सामने आए वोटों में दोनों प्रमुख दलों के घोषित संख्याबल और प्रत्याशियों को मिले मतों में अंतर देखने को मिला।
कोटा में भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी ने 65 वोट हासिल किए। कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता सुमन को 35 वोट मिले। इस तरह भाजपा प्रत्याशी ने 30 वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
जोधपुर में भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता ने 53 वोट हासिल किए। कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सोलंकी को 47 वोट मिले। मेहता ने 6 वोट के अंतर से चुनाव जीता।
जोधपुर चुनाव से पहले दोनों दलों के प्रत्याशियों के नामांकन पर आपत्तियां भी दर्ज की गई थीं, जिन्हें रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज करते हुए दोनों उम्मीदवारों के नामांकन वैध माने थे।
बीकानेर राजस्थान का ऐसा नगर निगम रहा, जहां कांग्रेस ने महापौर पद अपने पास बरकरार रखा। कांग्रेस के अनिल कल्ला ने भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत को 50-30 से हराया। बीकानेर के 80 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के पास 42 पार्षद थे, जबकि भाजपा के 27 पार्षद थे। कल्ला को कांग्रेस की मूल संख्या से अधिक वोट मिले।
अजमेर में भाजपा की अनामिका शर्मा महापौर चुनी गईं। उन्हें 43 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट प्राप्त हुए। यहां भाजपा के घोषित पार्षदों की संख्या 32 थी, जबकि कांग्रेस के 37 और निर्दलीय 11 पार्षद थे। महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को अतिरिक्त समर्थन मिला।
उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी को 55 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की पूनम कुंवर राठौड़ को 25 वोट प्राप्त हुए। उदयपुर में भाजपा के पास 53 पार्षद थे और तीन निर्दलीयों के समर्थन की जानकारी सामने आई थी।
अलवर में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल को 42 वोट मिले। कांग्रेस की कमलेश शर्मा को 23 वोट प्राप्त हुए। यहां भाजपा ने निर्दलीय और एक बसपा पार्षद के समर्थन से महापौर चुनाव में बहुमत हासिल किया।
पाली में भाजपा की नमिता बुबकिया 33 वोट लेकर महापौर बनीं। निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ को 29 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को सिर्फ 3 वोट प्राप्त हुए। भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच अंतर 4 वोट रहा। पाली के परिणाम में कांग्रेस के आधिकारिक प्रत्याशी को मिले बेहद कम वोट चर्चा का विषय रहे।
भरतपुर में भाजपा की अनुराधा सिंह और भीलवाड़ा में भाजपा की जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुनी गईं। भीलवाड़ा में जसवंत कंवर नगर निगम की पहली महिला महापौर बनीं। उन्होंने निर्विरोध चुनाव जीता।
महापौर चुनाव के बाद अब नगर निगमों में उप महापौर के चुनाव पर फोकस है। सात निगमों में 22 सितंबर को हुए उप महापौर चुनावों में भाजपा ने छह पद जीते, जबकि पाली में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहा। कांग्रेस कोई उप महापौर पद नहीं जीत सकी।
इस तरह राजस्थान के 10 नगर निगमों के महापौर चुनाव में भाजपा के 9 और कांग्रेस के एक महापौर चुने गए हैं। अब इन नगर निगमों में उप महापौर और स्थानीय निकायों के कामकाज पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।