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राजस्थान निकाय चुनाव: 7 में से 6 नगर निगमों पर भाजपा का कब्जा, बीकानेर में कांग्रेस ने बचाई साख

जयपुर। राजस्थान में सोमवार को 273 शहरी निकायों में मेयर, सभापति और चेयरमैन पद के लिए हुए चुनाव के परिणामों ने प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। नगर निगमों में भाजपा का दबदबा देखने को मिला, जहां 7 में से 6 नगर निगमों में भाजपा समर्थित उम्मीदवार मेयर बनने में सफल रहे। वहीं कांग्रेस केवल बीकानेर नगर निगम में अपना महापौर बनाने में कामयाब रही।

सबसे ज्यादा चर्चा अजमेर और पाली नगर निगम के चुनाव परिणामों की रही, जहां पार्षद संख्या में बढ़त होने के बावजूद कांग्रेस अपना मेयर नहीं बना सकी। दोनों ही नगर निगमों में भाजपा ने बाजी मारते हुए कांग्रेस को बड़ा झटका दिया।

अजमेर और पाली में कांग्रेस को झटका

अजमेर नगर निगम में भाजपा की अनामिका शर्मा मेयर निर्वाचित हुईं। उन्हें कुल 43 वोट मिले, जबकि भाजपा के पास 32 पार्षद थे। परिणाम ने क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चाओं को जन्म दे दिया।

वहीं पाली नगर निगम में भाजपा की नमिता बुबकिया मेयर बनीं। उन्हें 33 वोट प्राप्त हुए, जबकि भाजपा के केवल 21 पार्षद जीतकर आए थे। दूसरी ओर कांग्रेस की सुमित्रा जैन को मात्र 3 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के पास 29 पार्षद थे। इस परिणाम ने पाली की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

उदयपुर और अलवर में भी भाजपा की जीत

उदयपुर नगर निगम में भाजपा के पारस सिंघवी मेयर चुने गए। वहीं अलवर नगर निगम में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल ने जीत दर्ज की। अलवर में सुमनलता को 42 वोट, जबकि कांग्रेस की कमलेश शर्मा को 23 वोट मिले।

इन परिणामों के साथ भाजपा ने प्रदेश के अधिकांश नगर निगमों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।

बीकानेर में कांग्रेस को मिली राहत

बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के अनिल कल्ला महापौर निर्वाचित हुए। अनिल कल्ला पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के भतीजे हैं। बीकानेर में जीत दर्ज कर कांग्रेस ने नगर निगम स्तर पर अपनी मौजूदगी बनाए रखी।

अटरू में मंत्री के भाई को हार

बारां जिले की अटरू नगर पालिका में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। यहां शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी दिलावर को कांग्रेस की निशा नैनीवाल ने 3 वोटों से पराजित कर अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। यह परिणाम स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

कई निकायों में निर्विरोध चुनाव

प्रदेश के 309 शहरी निकायों में से 32 निकायों में निर्विरोध चुनाव हो चुके हैं। इनमें भरतपुर और भीलवाड़ा नगर निगम के मेयर पद के अलावा 6 नगर परिषदों के सभापति और 24 नगरपालिकाओं के अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए हैं।

वहीं तीन नगर निगमों सहित चार निकायों में अध्यक्ष और मेयर पद के चुनाव 25 सितंबर को कराए जाएंगे।

अजमेर में मतदान से पहले हंगामा

अजमेर नगर निगम चुनाव के दौरान मतदान से पहले निगम परिसर के बाहर राजनीतिक हंगामा भी देखने को मिला। कांग्रेस के पूर्व देहात अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मेयर पद की दावेदार किरण गढ़वाल के साथ निगम पहुंचे थे। उनके प्रवेश को लेकर भाजपा जिला अध्यक्ष रमेश सोनी और अन्य कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। स्थिति को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और भूपेंद्र सिंह को परिसर से बाहर ले जाया गया।

केकड़ी में 51 लाख के कथित ऑफर का वीडियो वायरल

अजमेर जिले की केकड़ी नगर पालिका में चुनाव से एक दिन पहले एक कथित वीडियो सामने आने के बाद सियासत गरमा गई। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अनिल मित्तल ने भाजपा पार्षद राजेंद्र चौधरी को कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने के लिए बड़ी रकम का प्रस्ताव दिया।

भाजपा का दावा है कि बातचीत में 51 लाख रुपये तक की राशि की चर्चा हुई। हालांकि, इस मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

आज होंगे उपाध्यक्ष और डिप्टी मेयर के चुनाव

मेयर और चेयरमैन चुनाव के बाद अब मंगलवार को प्रदेशभर में उपाध्यक्ष और डिप्टी मेयर पदों के लिए मतदान होगा। इसके तहत 7 नगर निगमों में डिप्टी मेयर, 47 नगर परिषदों में उपसभापति और 251 नगरपालिकाओं में उपाध्यक्ष चुने जाएंगे।

निकाय चुनाव के इन परिणामों ने प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दिया है। अब सभी की नजर उपाध्यक्ष और डिप्टी मेयर चुनावों पर टिकी हुई है, जहां कई जगहों पर राजनीतिक मुकाबला और रोचक होने की संभावना है।