पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, पंवार के नाम को संघ की पसंद के तौर पर प्रचारित किया गया था। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि उप महापौर के नाम को लेकर संघ की ओर से कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए थे। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संघ स्तर पर भी सवाल-जवाब किए जाने की चर्चा है। हालांकि संघ की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक तौर पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
उप महापौर पद के लिए नाम तय करने में संभाग प्रभारी ओंकार सिंह लखावत, शहर विधायक अतुल भंसाली और भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल की भूमिका होने की बात सामने आई है। अब पार्टी के भीतर इन नेताओं की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
चर्चा यह भी है कि पंवार के नाम को संघ की पसंद से जोड़कर सामने रखा गया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विवाद बढ़ने के बाद पार्टी नेताओं की ओर से इसे संगठन स्तर पर लिया गया निर्णय बताया जा रहा है।
विजय सिंह पंवार के बारे में बताया जा रहा है कि वह इस बार पार्षद का चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं थे। इसके बावजूद भाजपा ने उन्हें उनके ही वार्ड से चुनाव मैदान में उतारा। पार्टी का यह प्रयोग सफल रहा और पंवार ने कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर पार्षद का चुनाव जीत लिया।
इसके बाद पार्टी ने उन्हें उप महापौर पद के लिए भी उम्मीदवार बनाया। पंवार ने उप महापौर के लिए खुद लॉबिंग नहीं की थी। चुनाव में उन्हें 52 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के अब्दुल करीम जॉनी को 48 वोट मिले। इस तरह पंवार ने चार मतों के अंतर से उप महापौर का चुनाव जीत लिया।
भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने संघ की ओर से किसी तरह के निर्देश दिए जाने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पंवार का नाम पार्टी स्तर पर सर्वसम्मति से तय किया गया था।
पालीवाल के मुताबिक, विजय सिंह पंवार चुनाव लड़ना ही नहीं चाहते थे, लेकिन पार्टी के निर्णय के बाद उन्होंने चुनाव लड़ा। उन्होंने पंवार को पार्टी और आरएसएस का कर्मठ कार्यकर्ता भी बताया।
राजेंद्र पालीवाल, जिलाध्यक्ष, भाजपा ने कहा, “उप महापौर पद के लिए पंवार का नाम पार्टी स्तर पर सर्वसम्मति से तय किया गया था। संघ की तरफ से ऐसा कोई निर्देश नहीं था।”
फिलहाल उप महापौर के नाम को लेकर पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं पर भाजपा की ओर से यही आधिकारिक पक्ष सामने आया है। संघ की कथित भूमिका को लेकर लगाए जा रहे दावों पर उसकी ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।