एसीबी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बरामद फाइलों में कई दस्तावेज ऐसे हैं, जिन पर उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की सील और हस्ताक्षर मौजूद हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर नगर निगम द्वारा आवंटन पत्र और पट्टे जारी किए गए थे।
अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये दस्तावेज वास्तव में यूडीए से जारी हुए थे या फिर किसी ने फर्जी तरीके से यूडीए के नाम, सील और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर पूरे खेल को अंजाम दिया। यदि दस्तावेज वास्तविक हैं तो उन्हें तैयार करने वाले अधिकारी-कर्मचारी कौन थे और यदि दस्तावेज फर्जी हैं तो नगर निगम ने उनकी सत्यता की जांच किए बिना आगे की प्रक्रिया कैसे पूरी कर दी।
जांच एजेंसियां अब इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई थी। निगम के पूर्व बयानों के अनुसार, यूडीए से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर ही आवंटन और पट्टा जारी करने की प्रक्रिया पूरी की गई थी।
इन पट्टों के आधार पर कई खरीदारों को बैंकों से ऋण भी मिला। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि रिकॉर्ड में गड़बड़ी थी तो संबंधित अधिकारियों ने उसे रिकॉर्ड पर क्यों नहीं लिया और दस्तावेजों की प्रमाणिकता सुनिश्चित किए बिना फाइलें आगे कैसे बढ़ गईं।
एसीबी जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया है। यूडीए से नगर निगम को हस्तांतरित कुछ कॉलोनियों की मूल फाइलें निगम के रिकॉर्ड तक पहुंची ही नहीं। बाद में जब फाइलें सामने आईं तो उनमें भूखंडों के नंबर बदले हुए मिले।
जांच में ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां मूल भूखंड संख्या की फाइल अलग थी, लेकिन बाद में उसी से जुड़े 1-ए, 2-ए जैसे नए नंबरों की फाइलें रिकॉर्ड में जोड़ दी गईं। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि मूल रिकॉर्ड कहां रुका, नए दस्तावेज कब तैयार हुए और नंबर बदलने से आखिर किसे फायदा पहुंचा।
इसी मामले में एसीबी ने एएसपी मुकेश कुमार सोनी और कथित दलाल सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने परिवादी निरंजन मोगरा और उनकी पत्नी हेमलता कांकरिया को दर्ज मामलों में राहत दिलाने, अन्य मामलों में आरोपी नहीं बनाने तथा तलाशी के दौरान जब्त दस्तावेज लौटाने के बदले दो करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी थी।
एसीबी ने कार्रवाई के दौरान सज्जन सिंह जैन को रिश्वत की राशि के साथ पकड़ा, जबकि एएसपी मुकेश सोनी को उनके बालोतरा स्थित निवास से गिरफ्तार किया गया था।
एसीबी के अनुसार शिकायत मिलने के बाद तीन दिन तक रिश्वत मांगने के आरोपों का सत्यापन किया गया। इस दौरान डिजिटल रिकॉर्डिंग के जरिए बातचीत रिकॉर्ड की गई। जांच में सामने आया कि 23 सितंबर को सज्जन सिंह जैन ने परिवादी से दो करोड़ रुपए की मांग की थी।
बताया जा रहा है कि इसी दौरान दलाल ने पीड़ित की दो बार मुकेश सोनी से व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत भी कराई। जांच एजेंसी के मुताबिक बाद में एएसपी ने अपने मोबाइल फोन पर बड़े अक्षरों में संदेश लिखकर परिवादी को दिखाया, जिसमें कथित रूप से "सज्जन जो कहे, वो कर लेना" जैसी बात लिखी हुई थी। एसीबी ने इस पूरी प्रक्रिया की डिजिटल रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी है।
272 भूखंड घोटाले में सामने आई नई जानकारियों के बाद एसीबी की जांच अब केवल रिश्वत प्रकरण तक सीमित नहीं रह गई है। जांच एजेंसी यूडीए से नगर निगम तक फाइलों की आवाजाही, भूखंड नंबरों में बदलाव, दस्तावेजों की वैधता और पूरे नेटवर्क में शामिल संभावित अधिकारियों, कर्मचारियों तथा भूमाफिया की भूमिका की गहन पड़ताल कर रही है।
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच के दायरे में कई और नाम आ सकते हैं, क्योंकि बरामद 41 फाइलें इस पूरे मामले के कई अहम राज खोल सकती हैं।