फलोदी: राजस्थान के फलोदी जिले के पूनिया की ढाणी में 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 9 साल के मासूम भोमाराम की जिंदगी की जंग आखिरकार खत्म हो गई। करीब 39 घंटे तक चले चले लंबे और बेहद जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शुक्रवार देर रात 3:35 बजे बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला गया। मौके पर मौजूद एम्बुलेंस से मासूम को तुरंत लोहावट अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 640 फीट की गहराई में अटका बच्चा और उससे महज 30 फीट ऊपर फंसा एक बड़ा पत्थर सबसे बड़ी बाधा बन गया था:
तकनीकी असफलता: एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की आधुनिक मशीनें और उपकरण इस पत्थर के कारण बोरवेल की गहराई तक नहीं पहुँच पा रहे थे। इसके अलावा, 16 अक्टूबर (शुक्रवार) सुबह बोरवेल में उतारे गए कैमरे में बच्चे का मूवमेंट दिखना भी बंद हो गया था।
देसी जुगाड़ से मिली सफलता: जब सरकारी टीमें बेबस नजर आने लगीं, तब देसी जुगाड़ एक्सपर्ट माधाराम सुथार और उनकी टीम ने कमान संभाली। उन्होंने बोरवेल के अंदर की स्थिति और पत्थर के आकार के हिसाब से लोहे के सरियों का एक विशेष ढांचा तैयार किया।
देसी एक्सपर्ट माधाराम की टीम के सदस्य जगमाल ने बताया कि इस जटिल ऑपरेशन को किस तरह अंजाम दिया गया:
स्ट्रक्चर और वेल्डिंग: बोरवेल के अंदर के आकार को कैमरे से देखकर लोहे के सरियों को एक-एक कर वेल्डिंग कर एक विशेष ढांचा तैयार किया गया, ताकि बोरवेल की दीवारों पर दबाव न पड़े।
पत्थर को बाहर निकाला: बोरवेल में उतारे जाने के बाद जैसे ही यह जुगाड़ नीचे पहुँचा, इसके चिमटेनुमा लॉक ने पत्थर को मजबूती से जकड़ लिया। इसके बाद रस्सी की मदद से पत्थर को सुरक्षित बाहर खींचा गया। घटना के करीब 34 घंटे बाद इस पत्थर को निकाला जा सका था।
बच्चे का रेस्क्यू: पत्थर हटने के तुरंत बाद उसी तर्ज पर सरियों का जाल बनाकर बच्चे को बाहर निकालने के लिए देर रात अभियान चलाया गया और शुक्रवार देर रात 3:35 बजे मासूम के शव को बाहर निकाल लिया गया।
गौरतलब है कि लोहावट क्षेत्र की पूनिया की ढाणी में 15 अक्टूबर को दोपहर करीब 12:30 बजे खेल-खेल में या मोटर निकालते समय 9 साल का भोमाराम 1050 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिर गया था। वह बोरवेल में लगभग 640 फीट की अगाध गहराई में अटका हुआ था। प्रशासन और परिजनों के अथक प्रयासों के बावजूद मासूम को बचाया नहीं जा सका, जिससे पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।