जानकारी के अनुसार, गुरुवार को सुल्तान सिंह बराल ने सीकर के पुलिस अधीक्षक संजीव नैन के समक्ष वीआरएस के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। विभाग ने प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करते हुए उसी शाम उनका आवेदन मंजूर कर लिया। इसके बाद उनके जिला परिषद चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है। अब वह वार्ड नंबर 40 से उम्मीदवार के तौर पर अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने की तैयारी में हैं।
सुल्तान सिंह बराल रानोली थाने में तैनात थे। इन दिनों शारदीय नवरात्र के अवसर पर सीकर के प्रसिद्ध जीणमाता मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मेले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसी दौरान सुल्तान सिंह के वीआरएस लेने की खबर सामने आई।
त्योहार और मेले की सुरक्षा व्यवस्था के बीच उनके इस फैसले ने पुलिस महकमे और स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा है। हालांकि, चुनाव लड़ने की तैयारी के अलावा उनके नौकरी छोड़ने के फैसले के पीछे किसी अन्य कारण की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
सुल्तान सिंह बराल का परिवार भी स्थानीय राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके पिता भागीरथमल ग्राम पंचायत जुराठड़ा में वार्ड पंच रह चुके हैं। वहीं, उनके छोटे भाई भी वार्ड पंच की जिम्मेदारी निभा चुके हैं और पहले सरपंच का चुनाव भी लड़ चुके हैं।
परिवार की इस राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते सुल्तान सिंह का चुनावी मैदान में उतरना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब तक पुलिस सेवा में काम करने वाले सुल्तान सिंह ग्रामीण मतदाताओं के बीच जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी पहचान बनाने की कोशिश करेंगे।
जिला परिषद के वार्ड नंबर 40 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे सुल्तान सिंह बराल के सामने अब मतदाताओं तक पहुंचने और अपनी प्राथमिकताएं रखने की चुनौती होगी। पुलिस सेवा में उनका अनुभव प्रशासनिक कामकाज और कानून-व्यवस्था से जुड़ा रहा है। हालांकि, चुनाव में मतदाताओं का समर्थन उम्मीदवारों के स्थानीय मुद्दों, जनसंपर्क और चुनावी रणनीति समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
पंचायती राज चुनावों के बीच सुल्तान सिंह का पुलिस सेवा से राजनीति की ओर कदम बढ़ाना सीकर जिले की चुनावी गतिविधियों में एक नया घटनाक्रम है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि वार्ड नंबर 40 में उनका चुनावी अभियान किस तरह आगे बढ़ता है और वे मतदाताओं के सामने किन मुद्दों को प्रमुखता देते हैं।