सवाई माधोपुर। राजस्थान में जारी नगरीय निकाय चुनाव 2026 के बीच सवाई माधोपुर जिले के बामनवास क्षेत्र से एक कथित वायरल वीडियो ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। बामनवास पंचायत समिति की प्रधान शशिकला मीणा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन पर चुनावी सभा के दौरान मतदाताओं को भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मतदान करने के लिए कथित रूप से चेतावनी देने का आरोप लगाया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोल दिया है।
जानकारी के अनुसार, यह वीडियो बामनवास क्षेत्र में आयोजित एक चुनावी जनसभा का बताया जा रहा है। वायरल क्लिप में प्रधान शशिकला मीणा कथित तौर पर यह कहती सुनाई दे रही हैं कि यदि भाजपा के पक्ष में मतदान नहीं किया गया तो लोगों को पुलिस थानों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। हालांकि वीडियो की सत्यता और उसके पूरे संदर्भ को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।
मामले की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जिस मंच से यह कथित बयान दिया गया, वहां भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। कार्यक्रम में भाजपा विधायक जितेंद्र गोठवाल, भाजपा समर्थित प्रत्याशी राजेंद्र मीणा और खंडार प्रधान नरेंद्र चौधरी सहित कई स्थानीय नेता उपस्थित बताए जा रहे हैं। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे को लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए भाजपा को घेरने में जुट गया है।
वीडियो वायरल होने के बाद राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने इसे लोकतंत्र और स्वतंत्र मतदान की भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि मतदाताओं को डराकर वोट हासिल करने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है। जूली ने आरोप लगाया कि सत्ता के प्रभाव का उपयोग कर आम लोगों में भय का माहौल बनाया जा रहा है, जो किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव के लिए उचित नहीं माना जा सकता।
उधर, इस मामले को लेकर भाजपा की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी माहौल के बीच वायरल वीडियो और उससे जुड़े आरोप-प्रत्यारोप आने वाले दिनों में सवाई माधोपुर और आसपास के क्षेत्रों की राजनीति को और अधिक गर्मा सकते हैं।
निकाय चुनाव के बीच सामने आए इस विवाद ने एक बार फिर चुनावी सभाओं में दिए जाने वाले बयानों और उनकी राजनीतिक व्याख्याओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग, प्रशासन और संबंधित पक्ष इस मामले पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।