शहीद स्मारक पर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने आरपीएससी की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए:
सिलेबस से हटकर पूछा गया पेपर: अभ्यर्थियों का आरोप है कि आरपीएससी द्वारा तैयार किए गए पेपर का पैटर्न निर्धारित पाठ्यक्रम (Syllabus) के अनुरूप नहीं था। प्रश्नों का स्तर इतना कठिन और अतार्किक था कि अभ्यर्थियों के लिए समय प्रबंधन करना भी मुश्किल हो गया।
कटऑफ नियम पर संकट: अभ्यर्थियों ने कहा कि जनरल नॉलेज (GK) के पेपर में आयोग द्वारा निर्धारित 36% अनिवार्य न्यूनतम अंक का नियम पूरा करना भी उम्मीदवारों के लिए चुनौती बन गया है। यदि इस पेपर को रद्द नहीं किया गया तो अभ्यर्थी कटऑफ अंक ही हासिल नहीं कर पाएंगे और अधिकांश पद खाली रह जाएंगे।
धरना स्थल पर मौजूद महिला अभ्यर्थियों ने परीक्षा के स्तर को लेकर अपनी बात रखी:
अभ्यर्थी पायल की पीड़ा: "मेरा सिलेक्शन वर्ष 2021 में आयोजित हुई मूल भर्ती परीक्षा में हो गया था। लेकिन भर्ती प्रक्रिया में धांधली के बाद परीक्षा रद्द हुई तो मैंने फिर से दिन-रात एक करके तैयारी की। इस बार जब री-एग्जाम दिया तो पेपर का पैटर्न पूरी तरह बदला हुआ और अत्यधिक कठिन था। इस विषमता को देखते हुए परीक्षा फिर से कराना ही न्यायसंगत होगा।"
अभ्यर्थी मीनाक्षी के गंभीर आरोप: "पेपर बिल्कुल भी लॉजिकल तरीके से तैयार नहीं किया गया था। री-एग्जाम में संबंधित विषय से जुड़े प्रश्न पूछने के बजाय ऐसे अतार्किक सवाल पूछे गए जिनके फैक्ट्स भी समझ में नहीं आ रहे थे। जब खुद आरपीएससी मानती है कि पेपर सेटर से चूक हुई है, तो ऐसे पेपर को तुरंत निरस्त कर देना चाहिए। इस स्तर के पेपर से कोई भी अभ्यर्थी पासिंग मार्क्स नहीं ला पाएगा।"
मंगलवार को अभ्यर्थियों ने शहीद स्मारक पर एकत्रित होकर राज्य सरकार और आरपीएससी के खिलाफ नारेबाजी की:
प्रमुख मांगें: अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि 20 सितंबर को आयोजित इस री-एग्जाम को तुरंत रद्द किया जाए और सिलेबस व तय पैटर्न के आधार पर दोबारा पारदर्शी परीक्षा आयोजित कराई जाए।
आयोग में सुधार की अपील: अभ्यर्थियों ने मांग की है कि आरपीएससी और चयन बोर्ड में अनुभवी विषय विशेषज्ञों को शामिल किया जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार के गैर-व्यावहारिक पेपरों से युवाओं का भविष्य बर्बाद न हो।