मथानिया नगरपालिका में कुल 25 वार्ड हैं और अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस ने 16 वार्ड जीते हैं, जबकि भाजपा के खाते में 7 और दो सीटें निर्दलीयों के पास हैं। अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस की ओर से लीला देवी और भाजपा की ओर से इंद्रा देवी मैदान में हैं।
अध्यक्ष चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने पक्ष में 16 पार्षदों के समर्थन का दावा किया। इसी बीच कांग्रेस पार्षदों को लेकर एक बस नगरपालिका परिसर पहुंची। बस की एंट्री को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और नगरपालिका के मुख्य द्वार पर धरना शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और मौके पर धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
मौके पर पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा भी पहुंचीं। मदेरणा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षदों को लेकर प्रशासन का रवैया पक्षपातपूर्ण है और सत्ता के दबाव में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं।
दिव्या मदेरणा ने मथानिया के घटनाक्रम को लेकर वर्तमान भाजपा विधायक भैराराम सियोल की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बनाया जा रहा है।
मदेरणा ने इससे पहले भी मथानिया नगरपालिका चुनाव की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। नामांकन के अंतिम दिन वह रिटर्निंग अधिकारी (RO) के कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गई थीं। उनका आरोप था कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी भाजपा विधायक RO कक्ष में मौजूद थे। इसको लेकर उन्होंने पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी।
दिव्या मदेरणा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रिटर्निंग अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान RO पर सत्ता पक्ष का दबाव है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्रीय विधायक के बुलाने पर RO चुनाव परिसर से बाहर उनसे मिलने के लिए आए।
मदेरणा ने कहा कि अगर जनता ने किसी दल को बहुमत नहीं दिया है तो सरकारी तंत्र के जरिए राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनादेश से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
हालांकि, इन आरोपों के संबंध में प्रशासन या भाजपा की ओर से अलग पक्ष सामने आने पर उसे भी इसी संदर्भ में देखा जाना होगा। नामांकन विवाद के बाद प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए ADM की नियुक्ति की थी और मथानिया CI को चुनावी प्रक्रिया से दूर रखने के निर्देश दिए गए थे।
मथानिया के घटनाक्रम को लेकर राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। जूली ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षदों को पुलिस और प्रशासन के दबाव में वोट डालने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
जूली ने चुनावी प्रक्रिया में पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्वाचित पार्षदों को स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल राजनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
मथानिया नगरपालिका के 25 वार्डों में कांग्रेस के 16 पार्षद होने के कारण अध्यक्ष चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने पक्ष में बहुमत होने का दावा किया है। भाजपा के पास 7 और निर्दलीयों के पास 2 पार्षद हैं। ऐसे में अब सभी की नजर अध्यक्ष पद के मतदान पर है।
नगरपालिका परिसर में हुए घटनाक्रम के बाद सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में चुनावी प्रक्रिया पूरी कराने की तैयारी है। अब अध्यक्ष पद के मतदान के बाद ही साफ होगा कि मथानिया नगरपालिका की कमान किसके हाथ में जाती है।