मंडल ने स्पष्ट किया है कि CTO जारी होने की तारीख या उसकी वैधता शुरू होने की तारीख चाहे जो भी हो, वार्षिक उत्पादन की गणना के लिए वित्तीय वर्ष ही मान्य होगा। इस फैसले से खनन इकाइयों के उत्पादन की निगरानी में एकरूपता आएगी और अधिकारियों के लिए निर्धारित क्षमता का आकलन करना आसान होगा।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव कपिल चंद्रावल की ओर से जारी आदेश में इस व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है। सक्षम स्तर से अनुमोदन मिलने के बाद आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे राजस्थान में लागू कर दिया गया है।
मंडल के अनुसार, राजस्थान जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण नियम, 1975 में वर्ष की परिभाषा 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के रूप में दी गई है। हालांकि, वायु प्रदूषण से संबंधित अधिनियम और उसके नियमों में उत्पादन से जुड़ी शर्तों के लिए वर्ष की अलग परिभाषा स्पष्ट नहीं थी।
दोनों अधिनियमों के प्रावधानों में इस अंतर के कारण खनन इकाइयों के CTO में वार्षिक उत्पादन की गणना को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती थी। खासकर तब, जब किसी खदान को CTO वित्तीय वर्ष के बीच में जारी किया जाता था या उसकी वैधता किसी अन्य तारीख से शुरू होती थी।
इस समस्या को समाप्त करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने वाटर एक्ट और एयर एक्ट के तहत जारी होने वाले CTO में वर्ष की एक समान परिभाषा लागू करने का निर्णय लिया है। अब दोनों कानूनों के तहत खनन इकाइयों की अनुमत वार्षिक उत्पादन क्षमता की गणना एक ही वित्तीय वर्ष के आधार पर की जाएगी।
नए आदेश के अनुसार, खदानों के CTO में निर्धारित वार्षिक उत्पादन क्षमता का आकलन केवल 1 अप्रैल से अगले वर्ष 31 मार्च तक की अवधि के आधार पर किया जाएगा। CTO जारी होने या उसकी वैधता शुरू होने की तारीख से अलग कोई नया उत्पादन वर्ष नहीं माना जाएगा।
इसका उद्देश्य खनन इकाइयों के उत्पादन की गणना और निगरानी के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा तय करना है। इससे खदान संचालकों और संबंधित अधिकारियों को यह समझने में आसानी होगी कि अनुमत वार्षिक उत्पादन क्षमता का हिसाब किस अवधि में किया जाना है।
मंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि आदेश का पालन प्रदेश की सभी संबंधित खनन इकाइयों में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में उत्पादन की निगरानी वित्तीय वर्ष के आधार पर करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सभी ग्रुप प्रभारियों और क्षेत्रीय अधिकारियों को नए नियम के अनुसार खनन इकाइयों के उत्पादन की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वार्षिक उत्पादन क्षमता का आकलन निर्धारित वित्तीय वर्ष के अनुरूप हो।
इसके साथ ही भविष्य में खनन इकाइयों को जारी किए जाने वाले CTO के मानक प्रारूप और शर्तों में भी बदलाव किया जाएगा। नई शर्तों में स्पष्ट रूप से उल्लेख रहेगा कि अनुमत वार्षिक उत्पादन क्षमता के संदर्भ में ‘वर्ष’ का अर्थ 1 अप्रैल से अगले वर्ष 31 मार्च तक की अवधि होगा।
इस बदलाव से CTO की शर्तों को लेकर अलग-अलग व्याख्या की गुंजाइश कम होगी। खदान संचालकों और अधिकारियों को उत्पादन की निर्धारित सीमा समझने में भी स्पष्टता मिलेगी।
नए नियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने अपने आईटी प्रभाग को ऑनलाइन सिस्टम में जरूरी तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल निगरानी और उत्पादन से जुड़े रिकॉर्ड में भी वित्तीय वर्ष की व्यवस्था स्वतः लागू हो सके।
ऑनलाइन सिस्टम में बदलाव होने के बाद खनन इकाइयों के उत्पादन संबंधी आंकड़ों की निगरानी निर्धारित समय-सीमा के अनुसार की जा सकेगी। इससे अधिकारियों के कामकाज में एकरूपता आने और गणना से जुड़े विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है।
RSPCB के इस फैसले से खनन इकाइयों की वार्षिक उत्पादन क्षमता की गणना के लिए स्पष्ट और समान आधार तय हो गया है। पहले वाटर एक्ट और एयर एक्ट के तहत वर्ष की परिभाषा को लेकर बनी स्थिति अब एक समान व्यवस्था से स्पष्ट होगी।
आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होने के साथ ही अधिकारियों को निगरानी और CTO के प्रारूप में बदलाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब खदानों के अनुमत वार्षिक उत्पादन का हिसाब 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के वित्तीय वर्ष के आधार पर ही रखा जाएगा।