Rajasthan

पिता ने 22 लाख का मकान बेचकर बेटी के लिए बनाया क्रिकेट मैदान, गांव की प्रिया पूनिया ने टीम इंडिया तक बनाई पहचान

चूरू। राजस्थान के चूरू जिले के राजगढ़ उपखंड का छोटा-सा गांव जणाऊ खारी। करीब 248 घरों वाले इस गांव की बेटी प्रिया पूनिया ने अपनी मेहनत, लगन और परिवार के त्याग के दम पर क्रिकेट की दुनिया में खास पहचान बनाई। गांव की गलियों से शुरू हुआ उनका क्रिकेट सफर भारतीय महिला क्रिकेट टीम तक पहुंचा। प्रिया की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उनके क्रिकेटर बनने के सपने को पूरा करने के लिए पिता सुरेंद्र पूनिया ने ऐसा फैसला लिया, जो किसी भी माता-पिता के लिए आसान नहीं होता।

बेटी को बेहतर क्रिकेट अभ्यास की सुविधा मिल सके, इसके लिए पिता ने जयपुर में अपना करीब 22 लाख रुपए का मकान बेच दिया। इसके बाद चौमूं के पास जमीन खरीदी और उसी जमीन को क्रिकेट अभ्यास के मैदान में बदल दिया। प्रिया ने इसी मैदान पर घंटों अभ्यास करते हुए अपनी बल्लेबाजी को निखारा और आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।

सात साल की उम्र में शुरू हुआ खेल का सफर

प्रिया पूनिया का जन्म 6 अगस्त 1996 को चूरू जिले के जणाऊ खारी गांव में हुआ। उनके पिता भारतीय सर्वेक्षण विभाग में कार्यरत रहे, जिसके कारण परिवार को अजमेर, जयपुर और दिल्ली जैसे शहरों में रहना पड़ा। प्रिया ने अपनी पढ़ाई दिल्ली से पूरी की।

बचपन से ही प्रिया की खेलों में रुचि थी। महज सात साल की उम्र में उन्होंने खेलों की ओर कदम बढ़ा दिया था। शुरुआत में पिता ने उन्हें बैडमिंटन और लॉन टेनिस की कोचिंग दिलाई, लेकिन प्रिया का मन इन खेलों में ज्यादा नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट की ओर रुख किया और एक क्रिकेट एकेडमी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया।

यहीं से उनके क्रिकेट करियर की असली शुरुआत हुई।

बेटी के लिए पिता ने बेच दिया मकान

प्रिया के क्रिकेट के प्रति बढ़ते जुनून को देखते हुए पिता सुरेंद्र पूनिया ने तय किया कि उन्हें बेहतर अभ्यास के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जयपुर में प्रशिक्षण के दौरान पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने पर उन्होंने बड़ा फैसला लिया।

उन्होंने करीब 22 लाख रुपए का अपना मकान बेच दिया और चौमूं के पास खेत खरीदा। खेती करने के बजाय उस जमीन को क्रिकेट अभ्यास के मैदान के रूप में तैयार किया गया। प्रिया ने इसी मैदान पर लगातार अभ्यास किया। गेंद और बल्ले के साथ घंटों बिताए गए इन दिनों ने उनकी बल्लेबाजी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।

परिवार के इस त्याग और प्रिया की मेहनत का नतीजा धीरे-धीरे घरेलू क्रिकेट में दिखाई देने लगा।

दिल्ली और राजस्थान के लिए खेला घरेलू क्रिकेट

प्रिया पूनिया ने घरेलू क्रिकेट में दिल्ली और राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। बतौर ओपनर बल्लेबाज उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। करीब एक दशक तक पारी की शुरुआत करते हुए उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया।

घरेलू क्रिकेट में उनके प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें इंडिया-ए टीम में खेलने का मौका मिला। इसके बाद उनके लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम के दरवाजे खुले।

न्यूजीलैंड के खिलाफ किया टी-20 डेब्यू

प्रिया ने फरवरी 2019 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले से भारतीय महिला क्रिकेट टीम में पदार्पण किया। इसके बाद अक्टूबर 2019 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने वनडे क्रिकेट में भी डेब्यू किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना उनके लंबे संघर्ष और मेहनत का परिणाम था। उनके करियर में एक पारी में नाबाद 75 रन का प्रदर्शन भी यादगार रहा। बतौर ओपनर उन्होंने अपनी तकनीक और धैर्य के दम पर टीम में जगह बनाई।

प्रिया के लिए भारतीय टीम की जर्सी पहनना हमेशा गर्व और रोमांच का क्षण रहा है। उनका मानना है कि टीम इंडिया की जर्सी हर बार उन्हें पहले से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है।

छोटे गांव की बेटियों के लिए बड़ी प्रेरणा

प्रिया पूनिया की कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस परिवार के त्याग और विश्वास की कहानी भी है, जिसने बेटी के सपने को अपना सपना बना लिया। पिता ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद बेटी को अभ्यास के लिए बेहतर माहौल देने का फैसला किया और प्रिया ने अपनी मेहनत से उस भरोसे को सफलता में बदल दिया।

जणाऊ खारी जैसे छोटे गांव से निकलकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम तक पहुंचने वाली प्रिया आज उन बेटियों के लिए प्रेरणा हैं, जो गांवों और छोटे शहरों से निकलकर खेलों में अपना करियर बनाना चाहती हैं।

उनकी कहानी बताती है कि प्रतिभा को अगर परिवार का साथ, सही दिशा और लगातार मेहनत मिल जाए तो गांव की मिट्टी से भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की उड़ान भरी जा सकती है।