Rajasthan

पंजाब में दलित युवक की मौत पर कांग्रेस का प्रदर्शन, सचिन पायलट समेत कई नेता हिरासत में

चंडीगढ़। पंजाब में संगरूर निवासी दलित युवक की मौत के मामले को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। चंडीगढ़ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा समेत कई कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। जब कांग्रेस कार्यकर्ता आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने कई नेताओं और समर्थकों को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और दलित युवक की मौत के मामले में न्याय की मांग उठाई।

सरकार पर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप

कांग्रेस का आरोप है कि संगरूर निवासी दलित युवक की मौत के मामले में आम आदमी पार्टी सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है। पार्टी ने मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ यह भी तय होना चाहिए कि युवक की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है।

कांग्रेस ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग भी उठाई है। पार्टी का कहना है कि मामले में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार पीड़ित परिवार की आवाज सुनने के बजाय पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।

राजा वड़िंग ने कार्यकर्ताओं से आंदोलन में जुटने की अपील की

प्रदर्शन से पहले पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पार्टी कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पीड़ित परिवार के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही है और आम आदमी पार्टी सरकार से जवाबदेही मांग रही है।

राजा वड़िंग ने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान किया। इसके बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन में पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर कूच किया।

पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोका

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मंत्री के आवास की ओर बढ़ने की सूचना के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। रास्ते में बैरिकेड लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच आगे बढ़ने को लेकर खींचतान की स्थिति भी बनी। इसके बाद पुलिस ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू किया।

सचिन पायलट, राजा वड़िंग और प्रताप सिंह बाजवा समेत कई वरिष्ठ नेताओं की हिरासत ने प्रदर्शन को और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। कांग्रेस ने इसे आम आदमी पार्टी सरकार की दमनकारी कार्रवाई बताया, जबकि प्रदर्शन के जरिए पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह दलित युवक की मौत के मामले को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है।

पंजाब प्रभारी बनने के बाद पायलट की पहली बड़ी परीक्षा

15 सितंबर को हुआ यह प्रदर्शन कांग्रेस प्रभारी के तौर पर सचिन पायलट के लिए पंजाब में शुरुआती राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस आलाकमान ने हाल ही में पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है।

पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से गुटबाजी और आपसी मतभेद की चर्चा होती रही है। ऐसे में पायलट के सामने पार्टी के अलग-अलग नेताओं और गुटों को एक मंच पर लाने की चुनौती है। उनके सामने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के राजनीतिक अभियान को धार देने की भी जिम्मेदारी है।

आंदोलन के जरिए संगठन को एकजुट करने की कोशिश

राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर भी है कि पंजाब कांग्रेस किस तरह सरकार विरोधी मुद्दों को आगे बढ़ाती है। दलित युवक की मौत का मामला कांग्रेस को सरकार पर हमला करने का बड़ा मुद्दा दे रहा है। पार्टी इसे कानून-व्यवस्था, सामाजिक न्याय और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में दिख रही है।

सचिन पायलट के लिए चुनौती सिर्फ सरकार को घेरने की नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर एकजुटता कायम रखने की भी है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर सड़क पर उतरना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

फिलहाल कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय और मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह इस मुद्दे को राजनीतिक और जन आंदोलन के रूप में उठाती रहेगी। पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ कांग्रेस का यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।