नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत गिरने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इमारत के मालिक हरिराम बंसल को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है। रविवार को हुए इस दर्दनाक हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल अस्पतालों में भर्ती हैं। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाने के काम में जुटे हुए हैं और आशंका जताई जा रही है कि अभी भी कुछ लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, हादसे के बाद से ही इमारत का मालिक हरिराम बंसल फरार था। उसके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने लुक-आउट नोटिस जारी किया था और गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया था। पुलिस की 10 टीमों को अलग-अलग स्थानों पर जांच और तलाश की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी अभियान के तहत सोमवार दोपहर हरिराम बंसल को भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है और पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि इमारत की स्थिति, मरम्मत कार्य और सुरक्षा मानकों को लेकर क्या-क्या लापरवाहियां बरती गई थीं।
सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर अचानक एक बहुमंजिला इमारत भरभराकर गिर गई थी। हादसे के समय इमारत में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। कुछ लोग वहां रह रहे थे, जबकि कुछ निर्माण और मरम्मत कार्य से जुड़े हुए थे। इमारत गिरने के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।
हादसे में कई लोग मलबे के नीचे दब गए थे। एनडीआरएफ, दमकल विभाग, पुलिस और अन्य एजेंसियों की टीमों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाया। कई घंटों की मशक्कत के बाद कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई। घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।
जानकारी के अनुसार, “हॉस्टल डेज” नाम से संचालित यह पांच मंजिला इमारत लड़कों के पीजी (पेइंग गेस्ट) के रूप में उपयोग में लाई जा रही थी। सत्य निकेतन क्षेत्र दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास स्थित है और यहां बड़ी संख्या में छात्र किराये के कमरों और पीजी में रहते हैं। इसी कारण हादसे के समय इमारत में कई छात्र भी मौजूद थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका लंबे समय से छात्रों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां बड़ी संख्या में निजी पीजी और हॉस्टल संचालित होते हैं। हादसे के बाद आसपास के छात्र और अभिभावक भी दहशत में हैं और क्षेत्र में स्थित अन्य इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
हादसे के बाद प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने लापरवाही के आरोप में पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते आवश्यक निरीक्षण और कार्रवाई की गई होती तो शायद इस प्रकार की दुर्घटना को रोका जा सकता था। निलंबन के साथ ही इन अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच भी शुरू कर दी गई है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से पूरी जानकारी ली और घायलों के उपचार की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि इस हादसे के लिए जो भी व्यक्ति या अधिकारी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जांच एजेंसियों को निष्पक्ष और तेज गति से जांच पूरी करने के निर्देश भी दिए।
दिल्ली पुलिस ने हरिराम बंसल और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, लापरवाही और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि इमारत के निर्माण, रखरखाव और उपयोग में नियमों का पालन किया गया था या नहीं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इमारत में कोई अवैध निर्माण या संरचनात्मक बदलाव तो नहीं किए गए थे।
जांच एजेंसियां इमारत के नक्शे, निर्माण अनुमति, सुरक्षा प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इमारत की स्थिति को लेकर पहले कोई शिकायत या चेतावनी दी गई थी या नहीं।
हादसे के बाद से राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। भारी मशीनों, क्रेनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। बचाव दल पूरी सावधानी के साथ काम कर रहा है ताकि यदि कोई व्यक्ति मलबे के नीचे फंसा हो तो उसे सुरक्षित निकाला जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे के नीचे कोई व्यक्ति नहीं बचा है। घटना ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।