जेडीए की ओर से की गई डिमार्केशन के बाद स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रभावित लोगों का कहना है कि कई जगह कार्रवाई की जद में पूरे मकान और दुकानें आ रही हैं। कुछ परिवारों के दो मंजिला मकान भी प्रस्तावित कार्रवाई से प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं, कुछ जगहों पर डिमार्केशन के बाद इतनी कम जमीन बचने की स्थिति है कि मकान या दुकान का इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है। इससे स्थानीय निवासियों के सामने घर और रोजगार से जुड़ी परेशानी खड़ी हो गई है।
जेडीए के नोटिस का जवाब सात दिन के भीतर देना है। नोटिस और डिमार्केशन के दौरान स्थानीय लोगों ने कार्रवाई का विरोध भी किया था।
कार्रवाई से प्रभावित लोगों ने अब हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल कर मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि जेडीए की कार्रवाई का सीधा असर उनके मकान और कारोबार पर पड़ रहा है, इसलिए उन्हें भी न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने प्रभावित लोगों की अर्जियों पर सुनवाई की। अदालत ने जेडीए को इन अर्जियों पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला सुरेश चंद रावत और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। इसी याचिका पर पूर्व में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जेडीए को सोडाला से गुर्जर की थड़ी तक करीब 2.4 किलोमीटर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।
निर्देशों में 100 फीट चौड़ी न्यू सांगानेर रोड के साथ स्थानीय विश्वा नगर की 30 फीट चौड़ी सड़क से अतिक्रमण और अवैध पार्किंग हटाने की कार्रवाई भी शामिल है।
हाईकोर्ट ने जेडीए को पूरी कार्रवाई दो महीने में पूरी करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जेडीए ने मौके पर डिमार्केशन शुरू कर अतिक्रमण की पहचान की और संबंधित मकान-दुकान मालिकों को नोटिस जारी किए।
डिमार्केशन के बाद करीब 260 मकान और दुकानें कार्रवाई की संभावित जद में बताए जा रहे हैं। इनमें से 210 लोगों को अब तक धारा 72 के तहत नोटिस दिए जा चुके हैं।
बुधवार को सुनवाई के दौरान जेडीए की ओर से अदालत को बताया गया कि 210 लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। जिन लोगों की ओर से नोटिस के जवाब प्राप्त हो रहे हैं, उनका परीक्षण कराया जा रहा है।
अब मामले में प्रभावित लोगों की अर्जियों पर जेडीए के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी। इस बीच स्थानीय निवासियों की नजर हाईकोर्ट की कार्रवाई पर है, क्योंकि प्रस्तावित अतिक्रमण हटाओ अभियान का सीधा असर उनके मकान और व्यवसाय पर पड़ सकता है।