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रणथंभौर में टूरिस्ट सीजन का बढ़ा रोमांच: जोन-4 में 2 घंटे तक दिखे बाघिन 'शक्ति' और उसके शावक

सवाई माधोपुर: रणथंभौर नेशनल पार्क में नया टूरिस्ट सीजन शुरू होते ही सैलानियों की चहल-पहल काफी बढ़ गई है। बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक टाइगर सफारी का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। इस बीच जंगल में बाघों की लगातार हो रही साइटिंग ने पर्यटकों का उत्साह दोगुना कर दिया है।

शुक्रवार सुबह की पारी में जोन नंबर-4 में सफारी पर निकले पर्यटकों को उस वक्त बड़ा सरप्राइज मिला, जब प्रसिद्ध बाघिन 'शक्ति' (टी-111) अपने दोनों डेढ़ वर्षीय शावकों के साथ काफी देर तक नजर आई।

 

सेमली वन क्षेत्र में चट्टान पर आराम करती दिखी बाघिन, शावकों पर लुटाया प्यार

शुक्रवार तड़के जोन नंबर-4 में सफारी के दौरान सेमली वन क्षेत्र में पर्यटकों को मां और शावकों का यह अद्भुत नजारा देखने को मिला:

  • चट्टान पर किया आराम: बाघिन शक्ति जंगल में एक बड़ी चट्टान के पास करीब 15 से 20 मिनट तक शांत भाव से आराम करती दिखाई दी। इस दौरान उसके दोनों शावक थोड़ी ही दूरी पर एक घने पेड़ की छांव में बैठे रहे।

  • मां-शावक का दुलार: कुछ समय बाद बाघिन अपनी जगह से उठी और शावकों के पास पहुंच गई। वहां उसने अपने एक शावक को प्यार से पुचकारा। जंगल के शांत माहौल में मां और बच्चों के बीच के इस वात्सल्य को देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे और करीब दो घंटे तक इस खूबसूरत दृश्य को निहारते रहे।

 

प्रसिद्ध 'मछली' के कुनबे की बाघिन टी-111, सिखा रही शिकार और जंगल के तौर-तरीके

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 8 वर्षीय बाघिन शक्ति (टी-111) रणथंभौर की मशहूर बाघिन 'मछली' और 'कृष्णा' के कुनबे से संबंध रखती है और अपनी आक्रामक व बेबाक शैली के लिए जानी जाती है:

  • मजबूत वंश परंपरा: बाघिन शक्ति का संबंध विश्व प्रसिद्ध बाघिन 'मछली' की पीढ़ी से है, जिससे उसकी लोकप्रियता पर्यटकों में काफी अधिक है।

  • शावकों की ट्रेनिंग: वर्तमान में शक्ति के साथ नजर आ रहे उसके दोनों शावकों की उम्र लगभग डेढ़ साल है। इस उम्र में शावक अपनी मां के साथ रहकर शिकार करने, क्षेत्र तय करने और जंगल में जीवित रहने के गुण सीखते हैं।

  • आकर्षण का केंद्र: पर्यटकों ने बाघिन और शावकों की हर गतिविधि को अपने कैमरों व मोबाइल में कैद किया, जो सोशल मीडिया पर भी खूब पसंद किया जा रहा है।