जयपुर: टोंक जिले के देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान समरावता गांव में उपखंड अधिकारी (SDM) को थप्पड़ मारने के चर्चित मामले में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। राजस्थान हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को एक बार फिर जमानत दे दी है।
इससे पहले टोंक की विशेष एससी-एसटी (SC-ST) कोर्ट ने जमानत की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उनकी बेल रद्द कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने अदालत में सरेंडर कर दिया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल उपमन की अदालत ने नरेश मीणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें सशर्त जमानत दी है। कोर्ट ने जमानत की रिहाई के साथ कड़ी शर्तें भी लागू की हैं:
थाने में उपस्थिति: नरेश मीणा को जमानत अवधि के दौरान हर महीने के पहले सप्ताह में संबंधित पुलिस थाने में अनिवार्य रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
अपराध से दूरी: जमानत के दौरान वे किसी भी अन्य आपराधिक गतिविधि या नए अपराध में शामिल नहीं होंगे।
महिमामंडन पर रोक: अदालत ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जेल से रिहा होने के बाद नरेश मीणा या उनके समर्थक समाज में उनकी छवि का महिमामंडन नहीं करेंगे।
गौरतलब है कि एसडीएम थप्पड़ कांड में हाईकोर्ट से पहली बार जमानत मिलने के बाद नरेश मीणा झालावाड़ स्कूल हादसे (जिसमें 7 बच्चों की मौत हुई थी) के विरोध में धरने पर बैठ गए थे।
एससी-एसटी कोर्ट ने किया था रद्द: इस घटना के बाद नगरफोर्ट थाना पुलिस ने नरेश मीणा पर जमानत की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए टोंक एससी-एसटी कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट ने जमानत निरस्त कर दी थी, जिसके बाद नरेश मीणा को पुलिस के समक्ष सरेंडर करना पड़ा था।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: दोबारा जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि जमानत के बाद दर्ज कराए गए तीन मामलों में से दो में नरेश मीणा की कोई भूमिका नहीं पाई गई है। वहीं, तीसरे मामले में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है और वे नियमित रूप से पुलिस थाने में हाजिरी दे रहे थे।
नरेश मीणा की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रजनीश गुप्ता और फतेह राम मीणा ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज किए गए अधिकांश मामले राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और भावना से प्रेरित हैं।
अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि झालावाड़ मामले में भी हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए प्रथमदृष्ट्या प्रकरण को राजनीति से प्रेरित माना था।
देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के लिए 13 नवंबर 2024 को मतदान के दौरान टोंक जिले के समरावता गांव में भारी बवाल हुआ था:
एसडीएम को मारा था थप्पड़: चुनाव बहिष्कार की मांग के बीच निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे नरेश मीणा ने ड्यूटी पर तैनात एसडीएम अमित चौधरी को सरेआम थप्पड़ मार दिया था।
आगजनी और हिंसा: इस घटना के बाद समरावता गांव और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस और ग्रामीणों के बीच भारी झड़प, पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं, जिसके बाद पुलिस ने नरेश मीणा को गिरफ्तार किया था।