जयपुर: राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। राज्य में जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों और वार्ड पंचों के चुनाव 4 चरणों में संपन्न कराए जाएंगे। मतदान की तिथियों के ऐलान के साथ ही प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आदर्श आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है।
इन चुनावों के माध्यम से प्रदेश भर में कुल 1.69 लाख नए पंचायतीराज जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम (EVM) मशीनों के जरिए कराए जाएंगे:
पहला चरण: 23 अक्टूबर को मतदान
दूसरा चरण: 29 अक्टूबर को मतदान
तीसरा चरण: 4 नवंबर को मतदान
चौथा चरण: 14 नवंबर को मतदान
मतगणना व परिणाम: 20 नवंबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।
ग्राम पंचायतों में सरपंच, उपसरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव बैलेट पेपर (मतपत्र) के माध्यम से होंगे:
पहला चरण: 25 अक्टूबर को मतदान
दूसरा चरण: 31 अक्टूबर को मतदान
तीसरा चरण: 6 नवंबर को मतदान
चौथा चरण: 16 नवंबर को मतदान
परिणाम: मतदान के दिन ही देर रात तक मतगणना कर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली जिलों में प्रमुख और प्रधानों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होने के कारण उनके चुनाव बाद में होंगे, हालांकि यहां के जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव अन्य जिलों के साथ ही कराया जाएगा।
इन चुनावों में आधी आबादी को बराबरी का हक दिया गया है। 50 फीसदी महिला आरक्षण के तहत 1.69 लाख जनप्रतिनिधियों में से आधी महिलाएं चुनकर आएंगी।
ईवीएम से चुनाव: 1,403 जिला परिषद सदस्य और 8,245 पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव ईवीएम से होगा। यही पंचायत समिति सदस्य मिलकर प्रदेश की 457 पंचायत समितियों में प्रधानों का चुनाव करेंगे।
बैलेट से चुनाव: 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और 1.30 लाख वार्ड पंचों का चुनाव बैलेट से होगा।
महिला प्रतिनिधित्व: 14,403 ग्राम पंचायतों में से करीब 7,200 महिला सरपंच, 7,200 महिला उपसरपंच और 65,000 महिला वार्ड पंच चुनी जाएंगी।
वर्गवार आरक्षण: सरपंच पदों में एसटी के लिए 3,058, एससी के लिए 2,493 और ओबीसी के लिए 1,961 पद आरक्षित किए गए हैं। वहीं वार्ड पंचों के पदों में एससी के लिए 21,962, एसटी के लिए 19,117 और ओबीसी के लिए 15,000 वार्ड आरक्षित हैं।
पंचायतीराज चुनावों में कुल मतदाताओं में 51.82% पुरुष और 48.18% महिला वोटर शामिल हैं।
सर्वाधिक वोटर: प्रदेश के 41 जिलों में सबसे ज्यादा 18.99 लाख मतदाता जयपुर जिले में हैं।
सबसे कम वोटर: सबसे कम 4.36 लाख मतदाता जैसलमेर जिले में दर्ज किए गए हैं।
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही पूरे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता प्रभाव में आ गई है:
तबादलों पर रोक: अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादलों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
सरकारी संसाधनों पर रोक: मंत्री और जनप्रतिनिधि अब अपने क्षेत्रों में सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे और न ही सरकारी गेस्ट हाउस या डाक बंगलों में ठहर सकेंगे।
नई घोषणाओं पर पाबंदी: सरकार किसी भी नई योजना, वित्तीय स्वीकृति या लोक-लुभावन कार्यक्रम की घोषणा नहीं कर सकेगी, जिससे मतदाता प्रभावित हों। हालांकि, पूर्व से चल रहे विकास कार्य और प्रक्रियाधीन टेंडर जारी रहेंगे।