जयपुर: जापान के नागोया में आयोजित हो रहे पैरा एशियन गेम्स के पहले दिन सोमवार को भारतीय महिला शूटर्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन कर दिया। राजस्थान की दो दिग्गज पैरा शूटर्स — सीकर की मोना अग्रवाल और जयपुर की अवनी लेखरा ने भारत को पहले ही दिन दो पदक दिलाए। राइफल शूटिंग की इस स्पर्धा में मोना ने स्वर्ण (Gold) और अवनी ने रजत (Silver) पदक अपने नाम किया है।
गेम्स के पहले दिन R2 विमेंस 10 मीटर राइफल शूटिंग की SH1 कैटेगरी का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और सांस रोक देने वाला रहा:
रिकॉर्ड स्कोर: सीकर की मोना अग्रवाल ने शानदार निशाना साधते हुए 250.0 अंकों का रिकॉर्ड स्कोर बनाया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। वहीं, दो बार की पैरालंपिक गोल्ड मेडल विजेता जयपुर की अवनी लेखरा 249.6 अंक हासिल कर दूसरे स्थान पर रहीं।
आखिरी शॉट का रोमांच: मुकाबले के अंतिम और 24वें शॉट से ठीक पहले मोना 239.2 अंकों के साथ अवनी (239.1 अंक) से महज 0.1 अंक आगे थीं। ऐसे में आखिरी शॉट पर सबकी निगाहें टिकी थीं, जहां मोना ने 10.8 का बेहतरीन शॉट लगाकर गोल्ड अपने नाम किया, जबकि अवनी ने 10.5 अंक बनाए।
एसएच1 कैटेगरी: उल्लेखनीय है कि SH1 कैटेगरी उन निशानेबाजों के लिए होती है, जिनके शरीर के निचले अंगों (कमर से नीचे) में दिव्यांगता होती है।
इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से देश को भविष्य के लिए भी बड़ी बढ़त मिली है:
लॉस एंजिल्स पैरालंपिक्स 2028: अवनी लेखरा के इस रजत पदक से भारत को साल 2028 में होने वाले लॉस एंजिल्स पैरालंपिक्स के लिए दूसरा कोटा स्थान प्राप्त हो गया है।
इससे पहले मोना अग्रवाल ने पिछले महीने साउथ कोरिया में आयोजित वर्ल्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट (WSPS) वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर देश के लिए पहला कोटा पक्का किया था।
सीकर जिले की रहने वाली मोना अग्रवाल की सफलता की यह दास्तान कड़ी मेहनत, संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति की एक मिसाल है:
बचपन की चुनौतियाँ: 8 नवंबर 1987 को जन्मी मोना को महज नौ महीने की उम्र में पोलियो हो गया था, जिसके कारण उनके दोनों पैर प्रभावित हो गए।
विभिन्न खेलों में जलवा: पैरा शूटिंग में आने से पहले मोना ने पैरा-एथलेटिक्स, पैरा-पावरलिफ्टिंग और सिटिंग वॉलीबॉल में भी अपनी किस्मत आजमाई। साल 2019 में उन्होंने पहली नेशनल सिटिंग वॉलीबॉल चैंपियनशिप में राजस्थान महिला टीम की कप्तानी करते हुए टीम को स्वर्ण पदक भी दिलाया था।
विवाह के पश्चात वर्तमान में वह जयपुर के झोटवाड़ा क्षेत्र में निवास करती हैं और अपनी उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ा रही हैं।