राजनीतिक खींचतान इतनी बढ़ गई है कि यह विवाद अब दिल्ली में भाजपा आलाकमान के गलियारों तक पहुंच गया है।
आरसीए के इस बहुचर्चित चुनाव में दोनों पैनल आमने-सामने डटे हुए हैं:
सरकार-समर्थित पैनल: इस पैनल में अध्यक्ष पद के लिए ब्रजकिशोर उपाध्याय मैदान में उतरे हैं। इस खेमे की कमान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण चतुर्वेदी के हाथों में बताई जा रही है।
नेता पुत्रों का पैनल: इसके मुकाबले में उतरे पैनल में अध्यक्ष पद पर राज्य के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर खड़े हैं। इसी पैनल से सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी और भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव भी चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं।
वरिष्ठ नेताओं के बेटों के पैनल ने पार्टी के भीतर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप लगाया गया है कि राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी चुनाव प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप कर रहे हैं और वोटर्स को डरा-धमका रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, सत्ता और संगठन के भीतर खड़े हुए इस बड़े अंतरकलह का मामला अब दिल्ली भाजपा आलाकमान की चौखट पर पहुंच चुका है।
आरसीए चुनाव को लेकर खड़े हुए इस सियासी बवाल में अब कांग्रेस भी कूद पड़ी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला:
लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल: डोटासरा ने कहा कि आरसीए का चुनाव अब महज किसी खेल संगठन की कार्यकारिणी चुनने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे भाजपा के भीतर राजनीतिक वर्चस्व, आपसी सहमति और प्रशासनिक हस्तक्षेप के गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
साम, दाम, दंड, भेद का आरोप: उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराने में पूरी तरह असमर्थ है और साम, दाम, दंड व भेद की नीति अपनाकर आरसीए पर कब्जा करना चाहती है।
गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि जो लोग नियमों के तहत जायज तरीके से वोट डालने पहुंचे थे, उन्हें डरा-धमकाकर रोका गया।