जयपुर: राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के तहत शुक्रवार को प्रदेश के 147 निकायों के लिए मतदान जारी है। छह नगर निगमों समेत 147 निकायों में दोपहर 3 बजे तक कुल मतदान में मिला-जुला रुझान देखने को मिला। छह नगर निगमों में जोधपुर नगर निगम 56.42 प्रतिशत मतदान के साथ सबसे आगे रहा, वहीं जयपुर नगर निगम में दोपहर 3 बजे तक 48.58 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई है।
मतदान के दौरान जयपुर, जोधपुर और दौसा के कई मतदान केंद्रों से फर्जी वोटिंग के आरोप, राजनीतिक बहसबाजी और हंगामे की खबरें सामने आईं।
राजधानी जयपुर के वार्ड नंबर 62 स्थित बूथ संख्या 23 पर फर्जी वोटिंग को लेकर अचानक माहौल गरमा गया:
प्रत्याशियों का विरोध: कांग्रेस प्रत्याशी और तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने एक जुट होकर सेक्टर मजिस्ट्रेट को लिखित शिकायत सौंपी।
गंभीर आरोप: शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया कि बूथ पर फर्जी तरीके से लगभग 150 शिफ्टेड मतदाताओं के वोट डलवाए गए हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर के महामंदिर इलाके स्थित जैन स्कूल में परिवार संग मतदान किया। इसके तुरंत बाद एक विवाद खड़ा हो गया:
भाजपा का आरोप: भाजपा ने पोलिंग टीम के एक कर्मचारी पर गहलोत के पैर छूने का आरोप लगाते हुए आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराई।
जांच रिपोर्ट: हालांकि, जिला प्रशासन की शुरुआती जांच में स्पष्ट हुआ कि पूर्व सीएम के पैर छूने वाला व्यक्ति पोलिंग टीम का सदस्य नहीं था, बल्कि कोई बाहरी समर्थक था।
दौसा जिले में मतदान के दौरान सियासी पारा काफी चढ़ गया:
सांसद से बहस: दौसा में कांग्रेस सांसद मुरारीलाल मीणा और भाजपा के पार्षद प्रत्याशी के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। भाजपा के बूथ एजेंट ने सांसद के मीडिया प्रभारी की बेटी पर फर्जी वोट डालने का आरोप लगाया।
लालसोट में हंगामा और लाठीचार्ज: लालसोट नगर परिषद के वार्ड नंबर 10 में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थकों ने एक-दूसरे पर फर्जी मतदान के आरोप लगाए, जिससे स्थिति बेकाबू होने लगी। पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में करने के लिए हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) कर हंगामा कर रहे लोगों को खदेड़ा।
तमाम गहमागहमी के बीच दौसा के लालसोट नगर परिषद (वार्ड 13) से एक भावुक और प्रेरक तस्वीर सामने आई। 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला मनभर देवी सोलंकी, जो पिछले कई वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं, करीब 35 साल बाद वोट डालने पोलिंग बूथ पहुंचीं। परिजन उन्हें घर से एंबुलेंस में बैठाकर लाए और स्ट्रेचर पर लादकर मतदान केंद्र के अंदर ले गए, जहां उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।