आरसीए में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष और कार्यकारी सदस्य के कुल छह पदों के लिए वोटिंग हुई।
35 मत पड़े: चुनाव में कुल 38 मतदाता जिला क्रिकेट संघों के प्रतिनिधि थे, जिनमें से 35 प्रतिनिधियों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
सील्ड पेटी में बंद जनादेश: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मतदान समाप्त होते ही बैलेट बॉक्स को चुनाव अधिकारी की मौजूदगी में सील पैक करके सुरक्षित रखवा दिया गया है। जब तक हाईकोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक नतीजे घोषित नहीं किए जाएंगे।
आरसीए के इस चुनाव में राज्य के कई सियासी दिग्गजों और मंत्रियों के बेटों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है:
अध्यक्ष पद पर सीधा मुकाबला: अध्यक्ष पद के लिए चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह और दौसा जिला क्रिकेट संघ के सचिव बृजकिशोर उपाध्याय आमने-सामने हैं।
अन्य दिग्गज मैदान में: राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी कोषाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, भाजपा विधायक जसवंत सिंह यादव के बेटे मोहित यादव ने उपाध्यक्ष और सचिव दोनों पदों पर अपनी दावेदारी ठोकी है। कुल 6 पदों के लिए 11 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं।
मतदान खत्म होने के तुरंत बाद धनंजय सिंह और उनके गुट के प्रत्याशियों ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए:
बाहरी लोगों की एंट्री: धनंजय सिंह ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्र पर 11 से 12 ऐसे लोग मौजूद थे, जिनका क्रिकेट या आरसीए से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने पूछा कि आखिर उन्हें अंदर प्रवेश क्यों दिया गया?
नए संघों के वोट नहीं पड़े: धनंजय ने सवाल उठाया कि डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा और बालोतरा के नए क्रिकेट संघों के सचिव एजीएम में आए थे, लेकिन उन्हें वोट नहीं डालने दिया गया। इस संबंध में इलेक्शन कमीशन को शिकायत दी गई है।
नेताओं के प्रभाव का आरोप: कोषाध्यक्ष पद के प्रत्याशी आशीष तिवाड़ी ने आरोप लगाया कि मतदान के दौरान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी की मौजूदगी दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि एक कैबिनेट रैंक के व्यक्ति की उपस्थिति से वोटर्स प्रभावित हुए या नहीं, यह गहन जांच का विषय है।
आरसीए की एडहॉक कमेटी के पूर्व कन्वीनर व भाजपा नेता दीनदयाल कुमावत तथा मेघा गौड़ ने चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, दीनदयाल कुमावत ने बाद में अध्यक्ष पद से अपना नामांकन वापस ले लिया था। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को रोकने से तो इनकार कर दिया, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक राजस्थान हाईकोर्ट सभी पक्षों को सुनकर अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक आरसीए चुनाव का परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा और सभी वोट सीलबंद मतपेटी में ही रहेंगे।