मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस बिपाशा बसु ने मां बनने के बाद महिलाओं को झेलनी पड़ने वाली बॉडी-शेमिंग और सोशल मीडिया ट्रोलिंग को लेकर खुलकर बात की है। अभिनेत्री ने बताया कि बेटी देवी के जन्म के बाद उन्हें भी लोगों की आलोचनाओं और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि समाज में नई मांओं से कुछ ऐसी अवास्तविक उम्मीदें की जाती हैं, जिन्हें पूरा करना हर महिला के लिए संभव नहीं होता।
बिपाशा ने महिलाओं के शरीर को लेकर बनी सामाजिक सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद महिला से उम्मीद की जाती है कि वह पहले जैसी फिट और स्लिम दिखाई दे। उनके मुताबिक हर महिला का शरीर अलग होता है और मां बनने के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में लौटने के लिए समय देना बेहद जरूरी है।
बिपाशा ने ‘एले इंडिया’ से बातचीत के दौरान कहा कि महिलाओं के शरीर को लेकर समाज की सोच आज भी काफी अजीब है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बच्चे को जन्म देने के बाद महिला से तुरंत पहले जैसी बॉडी में आने की उम्मीद क्यों की जाती है।
अभिनेत्री ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जैसे किसी जादू की तरह उम्मीद की जाती है कि बच्चा पैदा करने के बाद महिला तुरंत अपने पुराने शरीर में लौट आए। उन्होंने यह भी कहा कि जो उम्मीदें 20 साल की लड़की से की जाती हैं, वैसी ही अपेक्षाएं कई बार 40 साल की महिला से भी की जाती हैं।
उनके मुताबिक उम्र, शरीर और मातृत्व के अनुभव को समझे बिना महिलाओं को एक तय बॉडी शेप में देखने की कोशिश गलत है।
बिपाशा बसु और करण सिंह ग्रोवर के घर साल 2022 में बेटी देवी का जन्म हुआ था। अभिनेत्री ने बताया कि मां बनने के बाद उन्हें भी सोशल मीडिया पर काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि कुछ महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद जल्दी अपने पुराने शेप में लौट आती हैं, लेकिन हर महिला का अनुभव एक जैसा नहीं होता। इसके बावजूद समाज और सोशल मीडिया पर महिलाओं को उनके शरीर के आधार पर जज किया जाता है।
बिपाशा ने इस तरह की आलोचना को बेहद बेरहम बताया। उन्होंने कहा कि नई मां पहले ही बच्चे की देखभाल, अपनी दिनचर्या और निजी जिंदगी में कई बदलावों से गुजर रही होती है। ऐसे समय में उसके शरीर को लेकर टिप्पणी करना उसके मानसिक दबाव को और बढ़ा सकता है।
अभिनेत्री ने यह भी बताया कि बेटी के जन्म के बाद कुछ पैपराजी फोटोग्राफरों ने उनकी ऐसी तस्वीरें खींचीं, जिन्हें देखकर उन्हें असहज महसूस हुआ। उनका कहना था कि लोगों को सिर्फ तस्वीर दिखाई देती है, लेकिन उस तस्वीर के पीछे की परिस्थिति कोई नहीं समझता।
बिपाशा के अनुसार, मां बनने के बाद एक महिला की जिंदगी में कई तरह के बदलाव आते हैं। उसे बच्चे की देखभाल के साथ अपनी निजी जिंदगी, नींद, दिनचर्या और काम को भी संभालना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद लोगों का ध्यान अक्सर सिर्फ इस बात पर होता है कि महिला कितनी जल्दी अपने पुराने शरीर के आकार में वापस आती है।
बिपाशा ने नई मांओं पर पड़ने वाले सामाजिक दबाव को लेकर कहा कि अक्सर किसी को इस बात की परवाह नहीं होती कि महिला वास्तव में किस दौर से गुजर रही है। हर कोई बस यह उम्मीद करता है कि वह जल्द से जल्द पहले जैसी दिखाई देने लगे।
अभिनेत्री का कहना है कि इस सोच को बदलने की जरूरत है। मातृत्व के बाद महिला के शरीर में बदलाव स्वाभाविक प्रक्रिया है और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए।
उनकी यह बात उन महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश है, जो बच्चे के जन्म के बाद अपने शरीर को लेकर असुरक्षित महसूस करती हैं।
बिपाशा ने यह भी स्पष्ट किया कि इतनी नकारात्मकता के बावजूद उन्होंने लोगों की राय को अपनी जिंदगी पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि वह अपनी जिंदगी और अपनी यात्रा को अच्छी तरह समझती हैं और उन्हें पता है कि अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है।
अभिनेत्री का कहना है कि आत्मविश्वास का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को आलोचना सुनाई नहीं देती, बल्कि यह है कि वह दूसरों की राय को अपनी पहचान और आत्मसम्मान पर हावी न होने दे।
बिपाशा बसु की बात का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि हर महिला का शरीर अलग होता है और मां बनने के बाद उसे खुद को समय देना चाहिए। बच्चे को जन्म देना अपने आप में शरीर और जीवन में बड़ा बदलाव है। ऐसे में महिला से तुरंत पहले जैसी दिखने की उम्मीद करना उचित नहीं है।
उनका अनुभव इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि सोशल मीडिया और पैपराजी कल्चर के दौर में सेलिब्रिटीज ही नहीं, बल्कि आम महिलाएं भी बॉडी-शेमिंग और अवास्तविक सौंदर्य मानकों के दबाव का सामना करती हैं।
बिपाशा ने अपने अनुभव साझा करते हुए महिलाओं को यह संदेश दिया है कि अपने शरीर को स्वीकार करना और अपनी यात्रा पर भरोसा रखना ज्यादा जरूरी है। मां बनने के बाद शरीर में आए बदलाव कमजोरी नहीं, बल्कि मातृत्व की यात्रा का हिस्सा हैं।