दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखे हमले बोले।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र के मूल ढांचे पर हमला किया जा रहा है:
वोटिंग अधिकार छीनने का आरोप: दीपके ने कहा, "ज्ञानेश कुमार इस देश के सबसे बड़े गद्दार हैं। उन्होंने SIR (विशेष सूचना समीक्षा) के जरिए देश में 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट कर दिए हैं। आम जनता से उनका वोट देने का संवैधानिक अधिकार छीना जा रहा है।"
लोकतंत्र पर खतरा: उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र की परिभाषा यह है कि जनता अपनी सरकार चुने। लेकिन जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, तब से सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट डालेगा और कौन नहीं।
अभिजीत दीपके ने अपनी मांगों के समर्थन में एक राष्ट्रीय समाचार पत्र (इंडियन एक्सप्रेस) की रिपोर्ट का जिक्र किया:
आयुक्तों की असहमति: रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया कि SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
नहीं हुई कोई कार्रवाई: आरोप लगाया गया कि दो-दो चुनाव आयुक्तों द्वारा बार-बार आपत्ति जताए जाने के बावजूद आयोग द्वारा इन चेतावनियों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और न ही कोई सुधारात्मक कदम उठाया गया।
CJP फाउंडर ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के पीछे राजनीतिक कारणों का दावा करते हुए 4 बड़े आरोप लगाए:
2024 के नतीजों का डर: उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में '400 पार' का नारा देने के बावजूद BJP बहुमत के आंकड़े से चूक कर 240 सीटों पर सिमट गई। इसके बाद से ही पार्टी को महसूस हुआ कि क्षेत्रीय दल मजबूत हो रहे हैं।
क्षेत्रीय नेताओं को निशाना बनाने की साजिश: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और NCP से लेकर एमके स्टालिन, पिनराई विजयन, अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी जैसे दिग्गज नेताओं को एक-एक कर चुनावी नुकसान पहुंचाया गया। यह महज इत्तेफाक नहीं हो सकता, क्योंकि ये सभी 2024 में एकजुट होकर चुनाव लड़े थे।
ममता और केजरीवाल के गढ़ में वोट डिलीट: उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल के प्रभाव वाले क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर वोट डिलीट किए गए।
विपक्ष को खत्म करने की कोशिश: दीपके ने सवाल उठाया कि क्या यह कदम सिर्फ मजबूत विपक्षी नेताओं और पूरे विपक्ष को खत्म करने के लिए उठाया गया है? उन्होंने कहा कि हमें किसी खास दल से लगाव नहीं है, लेकिन अगर लोकतंत्र से विपक्ष ही खत्म कर दिया जाएगा, तो फिर देश में लोकतंत्र कैसे बचेगा?