जयशंकर ने अमेरिका की बदलती विदेश नीति पर तंज कसते हुए कहा कि जिस बहुपक्षीय कूटनीतिक मॉडल (Multi-alignment) के लिए पहले भारत की आलोचना की जाती थी, आज वाशिंगटन खुद उसी राह पर चल रहा है।
आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिका की भूमिका और सोच पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कड़ा रुख अपनाया:
पड़ोसी देश से प्रायोजित आतंकवाद: जयशंकर ने कहा कि भारत ने कई दशकों से अपने पड़ोसी देश (पाकिस्तान) की ओर से प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद का दंश झेला है।
सहानुभूति की कमी: उन्होंने कहा कि जब भारत के सबसे प्राथमिक और संवेदनशील चिंताओं पर साझेदार देशों (अमेरिका) की ओर से पर्याप्त समझ या सहानुभूति नहीं दिखती, तो इससे द्विपक्षीय संबंधों में समस्याएं पैदा होती हैं।
संबंधों पर असर: विदेश मंत्री ने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका संबंध सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ें, लेकिन इसके लिए दोनों देशों को इन बुनियादी असहमतियों और वास्तविकताओं को ईमानदारी से स्वीकार कर उनका समाधान निकालना होगा।
कार्यक्रम के दौरान अमेरिका के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक डेनियल रसेल ने व्यापार (Trade) और टैरिफ (Tariff) को लेकर पिछले एक साल में भारत-अमेरिका संबंधों में आई तल्खी को दूर करने पर सवाल पूछा।
ग्लोबल हकीकत: जयशंकर ने जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ रिश्ते बनाए रखना सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों के लिए भी पहले की तुलना में अधिक जटिल और कठिन हो गए हैं।
टैरिफ की अनिश्चितता: उन्होंने कहा कि अमेरिका के नए टैरिफ ढांचे और आर्थिक नीतियों में हो रहे बदलावों ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता की एक और परत जोड़ दी है, जिसका असर आपसी वार्ताओं पर पड़ रहा है।
चीन, रूस और अन्य देशों के साथ अमेरिका के बदलते रुख पर बोलते हुए जयशंकर ने अमेरिका की कूटनीतिक नीति पर कटाक्ष किया:
पुराना नजरिया बदला: विदेश मंत्री ने कहा कि पहले अमेरिका में यह सोच हावी थी कि भारत को अपने वैश्विक विकल्पों को सीमित रखना चाहिए और अपना पूरा ध्यान केवल अमेरिका पर केंद्रित करना चाहिए। लेकिन अब यह दिखावा पूरी तरह खत्म हो चुका है।
भारत की नकल कर रहा अमेरिका: उन्होंने कहा, "पहले जिस विदेश नीति और कूटनीति के लिए भारत पर सवाल उठाए जाते थे और हमारी आलोचना होती थी, आज वाशिंगटन खुद उसी नीति पर बड़े उत्साह के साथ अमल कर रहा है।"
एक साथ बहुपक्षीय रिश्ते: जयशंकर ने कहा कि आज अमेरिका खुद एक ही समय में रूस, यूक्रेन, चीन और एशिया के अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को साधने की कोशिश कर रहा है। यह साबित करता है कि बहुध्रुवीय दुनिया (Multipolar World) में भारत का कूटनीतिक रुख ही सही और व्यावहारिक दिशा है।