ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता और आधुनिक युद्ध तकनीक के इस्तेमाल को लेकर दुनिया का ध्यान भारत की ओर बढ़ा है। पश्चिमी सीमा की भौगोलिक और सामरिक स्थिति को देखते हुए यहां होने वाले सैन्य अभ्यास अब केवल नियमित युद्धाभ्यास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें आधुनिक तकनीक, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।
जोधपुर एयरबेस पर चल रहा बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास 'तरंग शक्ति-26' पश्चिमी राजस्थान के बढ़ते रणनीतिक महत्व का उदाहरण है। इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के साथ विदेशी वायुसेनाएं भी हिस्सा ले रही हैं। अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक एफ-35 लड़ाकू विमानों की भागीदारी ने इस अभ्यास को खास बना दिया है।
बहुराष्ट्रीय अभ्यासों का उद्देश्य अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल बढ़ाना, वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में संयुक्त अभियान की क्षमता को परखना और आधुनिक हवाई युद्ध तकनीकों का अनुभव साझा करना है।
इस तरह के अभ्यासों से भारतीय वायुसेना को अलग-अलग देशों के विमानों, हथियार प्रणालियों और ऑपरेशनल रणनीतियों के साथ काम करने का अनुभव मिलता है।
पश्चिमी राजस्थान की विशाल फील्ड फायरिंग रेंज लंबे समय से भारतीय सेना के युद्धाभ्यास का महत्वपूर्ण केंद्र रही हैं। पोकरण और महाजन जैसी रेंज में अब पारंपरिक हथियारों के साथ आधुनिक तकनीक का परीक्षण भी किया जा रहा है।
इन अभ्यासों में ड्रोन, स्वार्म ड्रोन तकनीक, काउंटर-यूएएस सिस्टम और एयर डिफेंस प्रणालियों को वास्तविक परिस्थितियों के करीब परखा जाता है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन और मानव रहित प्रणालियों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए इनकी पहचान, निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
भारत की सुरक्षा रणनीति में पश्चिमी सीमा का महत्व पाकिस्तान के साथ संभावित चुनौती और उत्तरी सीमा पर चीन से जुड़े सुरक्षा समीकरणों के कारण और बढ़ जाता है। ऐसे में सैन्य अभ्यासों का एक उद्देश्य अलग-अलग परिस्थितियों में सशस्त्र बलों की तैयारी और आपसी तालमेल को मजबूत करना भी है।
पश्चिमी राजस्थान का रेगिस्तानी इलाका सेना और वायुसेना को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में युद्ध क्षमता परखने का अवसर देता है। यहां लंबे समय से टैंक, तोपखाने, लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और मिसाइल प्रणालियों से जुड़े अभ्यास होते रहे हैं।
भारत की रक्षा नीति में अब सैन्य क्षमता के साथ रक्षा उत्पादन और तकनीकी सहयोग पर भी जोर है। आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के तहत देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण और निर्यात को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
ड्रोनैथॉन जैसे आयोजनों में भारतीय रक्षा कंपनियों, स्टार्टअप और एमएसएमई की भागीदारी बढ़ी है। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, निगरानी प्रणाली और अन्य आधुनिक रक्षा तकनीकों में निजी क्षेत्र की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
भारत और अमेरिका, फ्रांस, जापान समेत कई देशों के बीच रक्षा सहयोग भी लगातार विस्तार ले रहा है। संयुक्त सैन्य अभ्यासों के साथ तकनीकी सहयोग, रक्षा उत्पादन और सैन्य उपकरणों से जुड़े समझौतों पर भी जोर दिया जा रहा है।
पश्चिमी राजस्थान में भारत और दूसरे देशों के बीच कई महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास आयोजित होते रहे हैं।
तरंग शक्ति: भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास है। इसका पहला संस्करण 2024 में हुआ था, जबकि 2026 में इसका प्रमुख चरण जोधपुर में आयोजित किया जा रहा है।
युद्ध अभ्यास: भारत और अमेरिका का प्रमुख सैन्य अभ्यास है। 2026 के अभ्यास में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज समेत अन्य स्थानों पर संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधियां हुईं।
वीर गार्जियन: भारत और जापान की वायुसेनाओं के बीच होने वाला द्विपक्षीय अभ्यास है। इसके प्रमुख चरणों में जोधपुर भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
डेजर्ट नाइट: भारत, फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बहुपक्षीय हवाई अभ्यास है। इस अभ्यास में तीनों देशों की वायुसेनाएं संयुक्त रूप से हवाई युद्ध क्षमता का प्रदर्शन करती हैं।
गरुड़: भारत और फ्रांस की वायुसेनाओं का द्विपक्षीय अभ्यास है। इसका एक महत्वपूर्ण संस्करण जोधपुर एयरबेस पर आयोजित हो चुका है।
शक्ति: भारत और फ्रांस की सेनाओं के बीच होने वाला द्विपक्षीय थल सेना अभ्यास है। इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त अभियान और परिचालन तालमेल को मजबूत करना है।
इस तरह पश्चिमी राजस्थान अब केवल रेगिस्तानी युद्धाभ्यास का क्षेत्र नहीं रह गया है। पोकरण से जोधपुर और महाजन तक का इलाका आधुनिक हथियार प्रणालियों, ड्रोन तकनीक, एयर डिफेंस और बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों के जरिए भारत की बदलती रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।