ज्ञानेश कुमार पर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े लगभग 14 महत्वपूर्ण फैसले आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों (डॉ. सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) की सहमति के बिना एकतरफा लेने का आरोप है।
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि आयोग के फैसले कानूनन सर्वसम्मति या बहुमत से ही होने चाहिए। यदि रिकॉर्ड की जांच में कोई फैसला स्थापित प्रक्रिया के खिलाफ पाया जाता है, तो उसे रद्द या वापस लिया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मतदाता पंजीकरण के लिए उपयोग में लाए जाने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर सख्त रुख अपनाया:
भ्रम पर कोर्ट का स्पष्टीकरण: CJI सूर्यकांत ने कहा, "हम यह पूरी तरह साफ कर देना चाहते हैं कि किसी भी संशोधित फॉर्म-6 को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मंजूरी नहीं दी है।"
दावे पर सवाल: याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि 9 दिन पहले चुनाव आयोग ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया था कि SIR के लिए फॉर्म-6 के साथ लगाए गए अतिरिक्त घोषणापत्र (Declaration) को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी मिली हुई है।
अदालत करेगी जांच: पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पेश होने पर अदालत यह जांच करेगी कि फॉर्म-6 में इस तरह के बदलाव करने के आदेश किसने और किस अधिकार से दिए।
1. सिर्फ अखबार की खबर के आधार पर कार्रवाई संभव नहीं
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप मुख्य रूप से मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। कोई खबर 100% सही, आंशिक रूप से सही या गलत भी हो सकती है। इसलिए केवल अखबार की रिपोर्ट के आधार पर किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति (CEC) को सस्पेंड करने का अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत पहले चुनाव आयोग का आधिकारिक रिकॉर्ड देखेगी।
2. फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होना अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है। कानून के अनुसार आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से होने चाहिए और यदि मतभेद हो तो फैसला बहुमत से लिया जाना चाहिए। आयोग का कोई एक सदस्य अकेले निर्णय नहीं ले सकता।
3. अभी से एकतरफा फैसले का अनुमान लगाना गलत
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि बिना रिकॉर्ड देखे अदालत अभी यह नहीं मान सकती कि सारे फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले ही लिए हैं। बिना आयोग का पक्ष सुने जल्दबाजी में अंतरिम रोक लगाना प्रक्रिया के विपरीत होगा।
4. अवैध पाए गए फैसलों को किया जाएगा निष्प्रभावी
पीठ ने स्पष्ट संकेत दिए कि अगर चुनाव आयोग द्वारा सौंपे गए रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि जरूरी कानूनी प्रक्रिया, सर्वसम्मति या बहुमत का पालन किए बिना एकतरफा निर्णय थोपे गए थे, तो अदालत उन फैसलों पर तुरंत रोक लगाएगी और उन्हें रद्द (Undo/Injunct) कर देगी।
यह पूरा मामला इंडियन एक्सप्रेस की उस खोजी रिपोर्ट के बाद गरमाया, जिसमें दावा किया गया था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में बदलाव और फॉर्म-6 में नई शर्तें जोड़ने को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। आरोप है कि इन आपत्तियों के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एकतरफा फैसले लागू कर दिए।