महासतिया में मूसलाधार बारिश के बीच अंतिम संस्कार की सभी धार्मिक एवं राजसी परंपराएं निभाई गईं। उनके पुत्र लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने नम आंखों से अपनी माता को मुखाग्नि दी। इस दौरान माहौल बेहद गमगीन हो गया और लक्ष्यराज सिंह भावुक नजर आए।
इससे पहले पूर्व राजपरिवार के आधिकारिक निवास 'शंभू पैलेस' से विजयराज कुमारी की अंतिम यात्रा सुबह रवाना हुई:
सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब: करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबी इस अंतिम यात्रा में विभिन्न पूर्व राजपरिवारों के सदस्यों, गणमान्य नागरिकों और हजारों की संख्या में आम लोगों ने हिस्सा लिया।
भावुक हुए लोग: अंतिम दर्शनों के लिए रास्ते भर सड़कों के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ लाइन लगाकर खड़ी रही। लोगों ने नम आंखों से 'अमर रहे' के नारों के बीच पार्थिव देह पर पुष्प वर्षा कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
परिवार के सदस्य रहे मौजूद: अंतिम यात्रा में उनके बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, उनके पोते तथा मेवाड़ राजवंश के अन्य सदस्य पैदल साथ चल रहे थे।
विजयराज कुमारी उदयपुर और मेवाड़ क्षेत्र में अपनी परोपकारी गतिविधियों और सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती थीं:
शिक्षा क्षेत्र में योगदान: 1980 के दशक में 'महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल' (MMPS) के विकास, उसे एक व्यवस्थित, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक स्वरूप देने में उनकी अग्रणी और महत्वपूर्ण भूमिका रही।
परोपकारी कार्य: वे क्षेत्र में महिला शिक्षा और स्थानीय जनकल्याणकारी योजनाओं से लगातार जुड़ी रहीं।
उल्लेखनीय है कि विजयराज कुमारी के पति और मेवाड़ पूर्व राजपरिवार के प्रमुख सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ (80) का पिछले वर्ष मार्च माह में निधन हो गया था। वे भी लंबी बीमारी से जूझ रहे थे। एक वर्ष के भीतर ही राजपरिवार में दूसरे बड़े शोक से पूरे मेवाड़ क्षेत्र में लहर दौड़ गई है।