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पार्टी की सबसे प्रमुख चेहरों में से एक और पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को हार का सामना करना पड़ा।

जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के ऐतिहासिक संग्राम का फैसला आज सामने आ रहा है। सीकर रोड स्थित श्री भवानी निकेतन कॉलेज में बने मतगणना केंद्र पर वोटों की गिनती जारी है। 11 सितंबर 2026 को हुए मतदान में जयपुर की जनता ने 63.55% वोटिंग कर मैदान में मौजूद 723 प्रत्याशियों के भाग्य को ईवीएम में बंद कर दिया था। अब वोटों की गिनती के साथ ही साफ हो जाएगा कि गुलाबी नगरी में सत्ता का ताज किसके सिर सजेगा और किसे मायूसी हाथ लगेगी।

जयपुर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों ही प्रमुख दलों ने पूर्ण बहुमत के साथ अपना बोर्ड बनाने का दावा किया है। हालांकि, कई वार्डों में निर्दलीय और बागी प्रत्याशियों की मजबूत स्थिति ने मुकाबला बेहद दिलचस्प बना दिया है। जिला निर्वाचन आयोग द्वारा 15 कंट्रोल रूम और 150 से अधिक टेबलों के जरिए चरणबद्ध तरीके से परिणाम घोषित किए जा रहे हैं।जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब पार्टी की सबसे प्रमुख चेहरों में से एक और पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुईं ज्योति खंडेलवाल को इस चुनाव में मेयर पद की सबसे मजबूत और संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा था।

पार्टी आलाकमान से लेकर स्थानीय स्तर तक यह माना जा रहा था कि जीत दर्ज करने के बाद वे फिर से गुलाबी नगरी के मेयर पद की मुख्य दावेदार होंगी, लेकिन इस अप्रत्याशित हार ने भाजपा के पूरे सियासी गणित को बिगाड़ कर रख दिया है।

ज्योति खंडेलवाल की इस हार को नगर निगम चुनावों का अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने के बाद से ही उनके टिकट और उम्मीदवारी को लेकर अंदरूनी खींचतान की खबरें सामने आ रही थीं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष, स्थानीय स्तर पर हुए भीतरघात और कांग्रेस की मजबूत घेराबंदी के चलते उन्हें इस हार का मुंह देखना पड़ा है। इस हार के बाद न केवल भाजपा के मेयर बनाने के समीकरणों को गहरा झटका लगा है, बल्कि पार्टी के अंदरूनी गुटबाज़ी भी अब खुलकर सतह पर आने लगी है।जयपुर नगर निगम के कुछ वार्डों पर रिजल्ट होल्ड किए गए हैं, जहां इनकी EVM में तकनीकी खराबी मिली है। बताया जा रहा है कि अगर EVM सही नहीं होती हैं और वोट रिकवर नहीं होते हैं तो यहां री-पोलिंग भी करवाई जा सकती है। हालांकि री-पोलिंग की स्थिति तभी आएगी जब यहां जीतने वाले प्रत्याशी के वोटों का अंतर EVM में बंद वोटों से ज्यादा नहीं होगा। ऐसे में अगर जीत के निकट वाले प्रत्याशी के वोट का अंतर ज्यादा हुआ तो री-पोलिंग नहीं होगी।