पूर्व मुख्यमंत्री ने निकाय चुनाव में कांग्रेस के प्रचार अभियान में रही कमियों को खुलकर स्वीकार किया:
एकजुटता की कमी: गहलोत ने कहा, "अगर कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता एक साथ निकलते, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की ओर से कोई मजबूत प्रोग्राम बनता और सटीक प्लानिंग होती, तो सरकार के खिलाफ बने माहौल का सीधा फायदा कांग्रेस को मिलता। हम और ज्यादा सीटें जीत सकते थे।"
प्रचार पर सवाल: मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं के आक्रामक चुनाव प्रचार के मुकाबले कांग्रेस की सुस्त रणनीति पर भी गहलोत ने चिंता जताई।
शहरी निकाय चुनाव में कांग्रेस से ज्यादा वोट और सीटें निर्दलीयों के खाते में जाने पर गहलोत ने आत्ममंथन की जरूरत बताई:
गहलोत का बड़ा सवाल: "सरकार से भारी नाराजगी के बावजूद निर्दलीयों को जो वोट मिले, वे कांग्रेस की झोली में क्यों नहीं आए? यह हमारे लिए बड़ा सवाल और चिंता का विषय है।"
पार्टी करेगी समीक्षा: उन्होंने कहा कि पार्टी स्तर पर बैठकर ही इस स्थिति का सही आकलन और विश्लेषण किया जा सकेगा कि कमी कहां रह गई।
सरकार विरोधी माहौल का जिक्र करते हुए गहलोत ने आगामी पंचायत चुनावों को लेकर उम्मीद जताई:
बीजेपी सरकार से नाराजगी: पूर्व सीएम ने दावा किया कि मौजूदा भाजपा सरकार के खिलाफ जनता में भारी नाराजगी है, जो साफ झलकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी नाराजगी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी, लेकिन इसका पूरा फायदा हम नहीं उठा सके।
संगठन के जाल के बाद भी चूक: गहलोत ने कहा, "हमने 'संगठन सृजन' कार्यक्रम चलाकर प्रदेश भर में ढांचा तैयार किया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में निर्दलीयों का जीतना सवाल खड़े करता है। उम्मीद है कि आगामी पंचायत चुनावों में कांग्रेस इस कमी को पूरा कर शानदार वापसी करेगी।"