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निकाय चुनाव नतीजों पर बोले BJP के राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी: '60% वार्ड हारने के बाद भी कैसे बनाए 200+ बोर्ड

जयपुर: राजस्थान नगरीय निकाय चुनावों के नतीजों के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। निकाय चुनाव में भाजपा भले ही महज 40.84 प्रतिशत वार्डों में ही जीत हासिल कर सकी थी, लेकिन इसके बावजूद पार्टी प्रदेश के 200 से अधिक निकायों में अपने बोर्ड और चेयरमैन बनाने में कामयाब रही।

कांग्रेस ने इस अप्रत्याशित जीत पर सवाल उठाते हुए भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग, पुलिस-प्रशासन के बेजा इस्तेमाल और निर्दलीयों पर दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। इन तमाम आरोपों और पार्टी की चुनावी रणनीति पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री व प्रदेश निकाय चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी ने मीडिया (भास्कर) से खास बातचीत में स्थिति स्पष्ट की।

 

कांग्रेस के आरोपों पर बोले हरीश द्विवेदी: 'जीतने वाले 15% निर्दलीय भाजपा के ही कार्यकर्ता थे'

कांग्रेस द्वारा लगाए गए दबाव और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को इतने बड़े पैमाने पर जनसमर्थन मिलना ऐतिहासिक है:

  • निर्दलीयों की असलियत बताई: हरीश द्विवेदी ने कहा, "चुनाव में लगभग 22 प्रतिशत निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। इनमें से 15 प्रतिशत से ज्यादा वे समर्पित भाजपा कार्यकर्ता हैं, जिन्हें स्थानीय समीकरणों या किसी कारणवश पार्टी का टिकट नहीं मिल पाया था। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा, जनता का विश्वास जीता और जीतते ही स्वाभाविक रूप से वापस अपनी मातृ संस्था भाजपा में आ गए।"

  • कांग्रेस का फैलाया भ्रम: उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी करारी हार को छिपाने के लिए प्रशासन पर दबाव और सत्ता के दुरुपयोग का झूठा नैरेटिव (प्रचार) गढ़ रही है।

 

60% वार्ड गंवाने के बाद भी 200 से अधिक निकायों में कैसे बना 'कमल का बोर्ड'?

निकाय चुनाव के कुल वोटों और सीटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा था:

  • वार्डों का अंकगणित: चुनाव परिणामों में भाजपा को करीब 40.84% वार्डों में जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस ने 35% और निर्दलीयों ने 24% वार्डों पर कब्जा जमाया था।

  • विपक्ष का गणित फेल: करीब 60 प्रतिशत वार्डों में भाजपा उम्मीदवारों की हार के बावजूद, पार्टी अपनी मजबूत चुनावी रणनीति, बागी कार्यकर्ताओं की घर वापसी और निर्दलीयों के भरोसे प्रदेश के 200 से अधिक नगरीय निकायों में अपना चेयरमैन/मेयर बनाने में पूरी तरह सफल रही।

 

निर्दलीयों को साधने की सटीक रणनीति आई काम

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री ने बताया कि पार्टी ने चुनाव नतीजों के तुरंत बाद ही सभी निर्दलीय और बागी विजेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया था:

  • संगठन की दूरदर्शिता: भाजपा संगठन ने चुनाव से पहले और बाद में अपने असंतुष्ट कार्यकर्ताओं से संवाद बनाए रखा।

  • विकास के नाम पर समर्थन: हरीश द्विवेदी ने दावा किया कि निर्दलीय पार्षदों ने अपने क्षेत्रों के विकास और राज्य में भाजपा सरकार की नीतियों में विश्वास व्यक्त करते हुए बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से पार्टी का समर्थन किया, जिसके दम पर भाजपा ने 200 से अधिक बोर्ड बनाकर इतिहास रचा।