चुनाव आयोग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और कांग्रेस द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों पर पलटावार करते हुए राठौड़ ने इसे 'वोट चोरी' करार दिया और कहा कि आज अगर एसआईआर (SIR) लागू है तो ऐसी अनियमिताओं का शुद्धिकरण ही किया जा रहा है।
बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में मदन राठौड़ ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने इतिहास में झांकना चाहिए:
'नागरिकता से पहले वोटर बनना वोट चोरी': राठौड़ ने कहा कि सोनिया गांधी देश की नागरिक बाद में बनीं और मतदाता सूची में उनका नाम पहले शामिल हो गया। यही असली 'वोट चोरी' है।
SIR की जरूरत पर जोर: उन्होंने कहा कि अगर उस समय एसआईआर (SIR) जैसी सख्त व्यवस्था लागू होती, तो वह भारत की मतदाता नहीं बन पातीं। एसआईआर का मुख्य उद्देश्य ही फर्जी और अवैध वोटरों को मतदाता सूची से हटाकर पारदर्शी सूची तैयार करना है।
मदन राठौड़ ने मताधिकार की मूल भावना पर जोर देते हुए कहा कि विपक्ष देश में भ्रामक धारणा फैला रहा है:
देशज बनाम बाहरी का मुद्दा: राठौड़ ने कहा, "हम सबको एक बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि भारत में मतदाता कौन होना चाहिए? जिसकी जड़ें इस देश से जुड़ी हों, जिसके दादा, परदादा और पिता इस देश के नागरिक रहे हों, उसे मताधिकार मिलना चाहिए। या फिर ऐसे व्यक्ति को वोट का अधिकार मिलना चाहिए जो बाहर से केवल व्यापार या फायदा उठाने आया है?"
वंशज शब्द पर दिया जोर: उन्होंने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति इस देश को अपनी मातृभूमि, पितृभूमि और पुण्यभूमि मानता है और जो इस मिट्टी का वास्तविक वंशज है, केवल उसी को भारत के लोकतंत्र में सरकार चुनने का अधिकार होना चाहिए।
विपक्ष के रुख पर हमला बोलते हुए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि सत्ता पाने के लिए देश के लोकतांत्रिक अधिकारों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए:
जनादेश का सम्मान: अगर एसआईआर (SIR) के जरिए कानूनी प्रक्रिया का पालन कर मतदाता सूचियों का शुद्धिकरण किया जा रहा है, तो इसमें किसी को क्या एतराज हो सकता है? सभी राजनीतिक दलों को जनादेश और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए।
सत्ता की राजनीति पर कटाक्ष: राठौड़ ने कहा कि किसी बाहरी व्यक्ति को मताधिकार का पावर देकर उसके जरिए सत्ता प्राप्त करने की कोशिश करना देशहित में ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को देश में भ्रम पैदा करने की राजनीति तुरंत बंद करनी चाहिए।