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जयपुर नगर निगम चुनाव: नतीजों से पहले ही BJP ने शुरू की 'बाड़ेबंदी', बसों से अज्ञात स्थान के लिए रवाना किए गए प्रत्याशी

जयपुर: राजस्थान नगरीय निकाय चुनावों की मतगणना से पहले ही भारतीय जनता पार्टी ने अपने पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए 'बाड़ेबंदी' का दौर शुरू कर दिया है। 14 सितंबर को होने वाली मतगणना और उसके बाद महापौर-उप महापौर चुनाव को देखते हुए पार्टी अपनी भावी 'शहर सरकार' पर किसी भी तरह का सियासी खतरा मोल नहीं लेना चाहती।

शनिवार को जयपुर स्थित राज्य भाजपा मुख्यालय पर पार्षद प्रत्याशियों का जमावड़ा लगा, जहां से उन्हें बसों में बैठाकर शहर से बाहर एक गुप्त स्थान के लिए रवाना कर दिया गया।

 

"22 सितंबर तक का सामान साथ लाएं"

पार्टी ने पार्षदों को साधने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाए हैं:

  • सामान के साथ बुलाया: पार्षद प्रत्याशियों को पार्टी नेतृत्व द्वारा शुक्रवार रात और शनिवार सुबह फोन कर दोपहर 12 बजे तक प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए। उन्हें अपने साथ 22 सितंबर तक का आवश्यक सामान लाने को कहा गया है।

  • महापौर चुनाव तक बाड़ेबंदी: प्रत्याशियों के अनुसार उन्हें 4 से 5 दिनों तक बाहर रुकने के लिए कहा गया है। उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर को मतगणना के बाद 21 सितंबर को महापौर (Mayor) और 22 सितंबर को उप-महापौर (Deputy Mayor) का चुनाव होना है।

 

जयपुर ही नहीं, उदयपुर समेत प्रदेश भर में भाजपा लागू कर रही यही 'फॉर्मूला'

भाजपा अपनी इस रणनीति को केवल राजधानी जयपुर तक सीमित नहीं रख रही है:

  • अन्य जिलों में भी बाड़ेबंदी: पार्टी सूत्रों के अनुसार, जयपुर के अलावा प्रदेश के उन सभी प्रमुख जिलों में भी यही मॉडल अपनाया जा रहा है जहां कड़ा मुकाबला फंसा हुआ है।

  • प्रशिक्षण शिविर के नाम पर एकजुटता: उदयपुर सहित कई अन्य नगर निगमों और नगर परिषदों में भी पार्षद उम्मीदवारों को 'प्रशिक्षण शिविर' (Training Camp) के नाम पर एक जगह एकत्रित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

 

हॉर्स ट्रेडिंग का डर: करीबी मुकाबले वाले निकायों पर पार्टी की विशेष नजर

भाजपा द्वारा नतीजों से पहले ही अपने उम्मीदवारों को सुरक्षा घेरे में लेने की मुख्य वजहें:

  • दूसरे दलों की सेंधमारी से बचाव: कई निकायों में भाजपा-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है। ऐसे में चुनाव नतीजे आने के बाद दूसरे दलों द्वारा निर्दलीय या विपक्षी पार्षदों से संपर्क साधने और हॉर्स ट्रेडिंग (क्रॉस वोटिंग) की कोशिश हो सकती है।

  • बहुमत का गणित और बोर्ड गठन: यदि किसी निकाय में स्पष्ट बहुमत के लिए कुछ पार्षदों की जरूरत पड़ती है, तो पार्टी अपने सभी पार्षदों को एक साथ रखकर निर्दलीयों को जोड़ने तथा मजबूती से अपना बोर्ड (महापौर) बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।