अंकिता के परिवार की मुख्य मांग दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले पर रोक लगाने और नियुक्ति रद्द करने की है। परिवार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील की है कि मामले की CBI जांच पूरी होने तक इस नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए। परिवार का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
हिरासत से रिहा होने के बाद अंकिता के पिता ने कहा कि यदि उनकी बेटी को न्याय नहीं मिला, तो परिवार देशभर में प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि उनकी पहली मांग दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति रद्द करने की है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो परिवार फिर से सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
अंकिता की मां सोनी देवी ने भी कहा कि नियुक्ति रद्द होने तक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें धरना देने की अनुमति नहीं दी गई, तो वह अपने घर पर भूख हड़ताल करेंगी। परिवार का कहना है कि वह अपनी बेटी के मामले में उठाए जा रहे सवालों और न्याय की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाता रहेगा।
अंकिता के परिवार ने मामले में कथित VIP की भूमिका को लेकर उठते रहे सवालों के बीच दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। परिवार का कहना है कि इस मामले से जुड़ी चिंताओं के बीच यह नियुक्ति उनके लिए परेशान करने वाली है।
हालांकि, मामले में संबंधित VIP की पहचान सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुई है। परिवार की आशंकाओं और आरोपों को अदालत में साबित तथ्यों से अलग समझना जरूरी है। परिवार की मांग है कि CBI जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाने और इसे रद्द करने के अनुरोध पर विचार किया जाए।
14 अक्टूबर की शाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा इंडिया गेट पहुंचे थे। दोनों ने धरने पर बैठे अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की और करीब एक घंटे तक उनके साथ रहे। राहुल गांधी ने अंकिता के पिता से बातचीत की, जबकि प्रियंका गांधी ने उनकी मां को गले लगाया और पानी पिलाया।
अंकिता का परिवार अपनी मांगों को लेकर उत्तराखंड से दिल्ली पहुंचा है। अंकिता की मां ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं हुई, लेकिन आम लोगों ने लगातार उनका साथ दिया है। परिवार को उम्मीद है कि देशभर के लोग न्याय की मांग में उनका समर्थन करते रहेंगे।
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या हुई थी। इसके छह दिन बाद, 24 सितंबर को उनका शव चिल्ला नहर से बरामद किया गया था। मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था।
30 मई 2025 को कोटद्वार की अदालत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी ने तीनों आरोपियों को हत्या, सबूत मिटाने और अन्य आरोपों में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद अंकिता का परिवार मामले से जुड़े अपने सवालों और न्याय की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहा है।
दुष्यंत कुमार गौतम को 12 अक्टूबर को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इसके बाद अंकिता के परिवार ने इस फैसले पर अपनी आपत्ति सार्वजनिक की और राष्ट्रपति से CBI जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाने तथा इसे रद्द करने की मांग की।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता इस तरह के व्यवहार के हकदार नहीं हैं और ऐसी कार्रवाई को समाज के लिए शर्मनाक बताया।
फिलहाल अंकिता का परिवार अपनी मांगों पर कायम है। परिवार का कहना है कि जब तक उसकी चिंताओं पर सुनवाई नहीं होती और न्याय की दिशा में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उसका विरोध जारी रहेगा।