बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच प्रभारियों को लेकर हुए सियासी कटाक्ष और ठहाकों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि प्रदेश कांग्रेस में अब सब कुछ ठीक चल रहा है।
दरअसल, सचिन पायलट को हाल ही में पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया गया है, जबकि राजस्थान कांग्रेस के मौजूदा प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा खुद पंजाब के वरिष्ठ नेता हैं। इसी सियासी समीकरण पर अशोक गहलोत ने चुटकी ली:
गहलोत का मजाकिया कटाक्ष: गहलोत ने रंधावा और पायलट की ओर इशारा करते हुए कहा— "पंजाब इंचार्ज (पायलट), अब बताइए... पहले आपके इंचार्ज ये (रंधावा) थे, अब इनके इंचार्ज आप हैं।"
पायलट का हाजिरजवाबी जवाब: गहलोत की इस बात पर सचिन पायलट ने मुस्कुराते हुए कहा— "सबके इंचार्ज तो आप ही हो... राजस्थान हो या पंजाब, क्या फर्क पड़ता है?"
गहलोत बोले- हम तो परमानेंट हैं: इस पर पूर्व सीएम गहलोत ने भी ठहाका लगाते हुए कहा— "हम तो परमानेंट इंचार्ज हैं।"
इस पूरी बातचीत के दौरान प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित वहां मौजूद तमाम वरिष्ठ नेताओं ने जमकर ठहाके लगाए।
वॉर रूम में आयोजित अहम बैठक के समाप्त होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया से मुखातिब होते हुए विपक्षी दलों और कयासबाजी लगाने वालों को सीधा संदेश दिया:
"आप लोग हमेशा पूछते हो कि कांग्रेस में एकता नहीं है। आज आपने खुद देख लिया, पूरी कांग्रेस में जबरदस्त एकता है। सब एकजुट होकर काम कर रहे हैं। अगली बार राजस्थान में फिर से कांग्रेस की सरकार बनेगी, इसे कोई रोक नहीं सकता। अगली बार आप यह सवाल कभी नहीं पूछोगे।"
आमतौर पर राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी और अंदरूनी कलह की चर्चाएं गर्म रहती हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से पार्टी का माहौल काफी बदला हुआ नजर आ रहा है:
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में डिनर: इससे पहले सोमवार को ही पूर्व सीएम गहलोत ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में पार्टी नेताओं के लिए एक विशेष डिनर (रात्रिभोज) का आयोजन किया था।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी: इस डिनर में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी, पूर्व प्रभारी अविनाश पांडे, बीडी कल्ला और मोहन प्रकाश सहित कई पूर्व मंत्री और विधायक शामिल हुए थे।
बढ़ती गर्मजोशी: नेताओं के बीच लगातार हो रही औपचारिक व अनौपचारिक मुलाकातों और गर्मजोशी से मिलने की इन तस्वीरों को आगामी चुनावों के दृष्टिकोण से कांग्रेस की मजबूत एकजुटता के तौर पर देखा जा रहा है।