विश्वेंद्र सिंह ने इस करारी हार के लिए सीधे तौर पर डोटासरा, भरतपुर जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा और डीग जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी को जिम्मेदार ठहराते हुए बेहद तल्ख बयानबाजी की है।
पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपनी ही पार्टी के नेतृत्व पर जोरदार प्रहार किया:
डोटासरा पर हमला: विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि निकाय चुनावों में पार्टी की लुटिया डूबने के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा मूक-बधिर बनकर बैठे हुए हैं।
भरतपुर आने की चुनौती: उन्होंने डोटासरा को भरतपुर आने की खुली चुनौती देते हुए कहा, "डोटासरा कभी भरतपुर आने की हिमाकत करके तो देखें, उनका पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान से भी ज्यादा अच्छा 'स्वागत' किया जाएगा।"
2013 के विवाद की यादें ताजा: विश्वेंद्र सिंह के इस बयान ने साल 2013 में तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान के भरतपुर दौरे के दौरान हुए ऐतिहासिक विरोध और खींचतान की यादों को एक बार फिर ताजा कर दिया है।
फेसबुक पर अपनी भड़ास निकालते हुए पूर्व मंत्री ने भरतपुर और डीग जिले में कांग्रेस के सूपड़ा साफ होने की मुख्य वजह संगठन के गलत फैसलों को बताया:
टिकट वितरण में धांधली: उन्होंने लिखा कि नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस की दुर्गति का एकमात्र कारण दोनों जिलाध्यक्षों द्वारा योग्य व समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर अपने चहेतों को रेवड़ियों की तरह टिकट बांटना था।
जनता का सबक: विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि गलत टिकट बंटवारे के कारण जनता ने इस चुनाव में पार्टी को कड़ा सबक सिखा दिया है।