महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए पूर्व मंत्री ने गंभीर आरोप लगाए:
अपराधों में बढ़ोतरी: खाचरियावास ने दावा किया कि भाजपा शासनकाल में राजस्थान में दुष्कर्म (रेप) के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है और राज्य इस मामले में देश में शीर्ष पायदान पर पहुंच गया है।
जनता मांगेगी हिसाब: उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। निकाय चुनाव में आम जनता इस बदहाल कानून व्यवस्था का जवाब अपने वोट की चोट से भाजपा को देगी।
निकाय चुनाव में वोटरों को लुभाने के लिए भाजपा पर अनैतिक हथकंडे और शराब बांटने का सीधा आरोप लगाते हुए खाचरियावास ने कहा:
शराब बांटने के आरोप: पिछले चार दिनों से प्रदेश के विभिन्न निकायों और वार्डों में भाजपा के लोग धड़ल्ले से शराब का वितरण कर रहे हैं।
पव्वे बांटने पर तंज: उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कई लोगों ने उनसे शिकायत की है कि भाजपा कार्यकर्ता पूरी बोतल देने के बजाय महज 'पव्वे' थमा रहे हैं। लोग अंग्रेजी शराब की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें घटिया दर्जे की देशी शराब दी जा रही है।
प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर हमला बोलते हुए खाचरियावास ने कई चौंकाने वाले आंकड़े और दावे पेश किए:
अस्पतालों में मौतें और लापरवाही: पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में कुप्रबंधन और लापरवाही के कारण 22 महिलाओं की जान चली गई। वहीं गलत इलाज के चलते 5 महिलाओं ने अपनी आंखों की रोशनी गंवा दी और 7 महिलाओं की किडनी फेल होने का मामला सामने आया है।
नकली दवाओं का कारोबार: उन्होंने दावा किया कि अस्पतालों में मरीजों को घटिया और नकली दवाइयां बांटी जा रही हैं, जिससे मरीज ठीक होने के बजाय और अधिक गंभीर स्थिति में पहुंच रहे हैं।
जयपुर शहर की समस्याओं का जिक्र करते हुए पूर्व खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने मुख्यमंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लिया:
सांगानेर को दरकिनार करने का आरोप: सीएम भजनलाल शर्मा जयपुर के अन्य हिस्सों में रोड शो कर रहे हैं, लेकिन वे अपने ही सांगानेर क्षेत्र में रोड शो करने से बच रहे हैं, क्योंकि वहां सड़कों की हालत बेहद जर्जर है।
वीआईपी सीटों का बुरा हाल: खाचरियावास ने कहा कि उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के विधानसभा क्षेत्रों में भी विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं। राजधानी के नागरिक पानी, सड़क और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, लेकिन सरकार में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।