इस दौरान टोंक रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और लगभग 5 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। बाद में प्रशासनिक और कृषि विभाग के आला अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में समाधान के ठोस आश्वासन के बाद रात करीब 8:30 बजे आंदोलन वापस ले लिया गया।
नरेश मीणा के जयपुर कूच के आह्वान को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने शिवदासपुरा टोल पर चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की थी:
छावनी में बदला टोल प्लाजा: मौके पर वाटर कैनन, एसटीएफ (STF) और आरएसी (RAC) के सैकड़ों जवानों को तैनात किया गया। सुरक्षा व्यवस्था की कमान कई पुलिस निरीक्षकों (Inspectors) और आरपीएस (RPS) अधिकारियों के हाथों में रही।
टोंक रोड पर चक्काजाम: पुलिस द्वारा रास्ता रोके जाने और किसानों के सड़क पर ही पड़ाव डालने के कारण टोंक-जयपुर हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जिससे राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जयपुर जिला प्रशासन और कृषि विभाग के उच्च अधिकारी वार्ता के लिए शिवदासपुरा टोल पहुंचे:
अधिकारियों का आश्वासन: कृषि विभाग के आयुक्त नरेश कुमार गोयल और एडीएम (ईस्ट) जयपुर नरेंद्र कुमार वर्मा ने नरेश मीणा और किसान प्रतिनिधियों से वार्ता की।
समाधान पर सहमति: अधिकारियों ने राज्य में खाद की सुचारू आपूर्ति, निर्धारित मूल्य पर उपलब्धता और खाद के साथ अन्य सामान जबरन बेचने (टैगिंग) पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया।
आंदोलन समाप्ति की घोषणा: आश्वासन मिलने के बाद रात करीब 8:30 बजे नरेश मीणा ने अपने समर्थकों के साथ आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया और वापस लौट गए, जिसके बाद हाईवे पर आवागमन सुचारू हो सका।
नरेश मीणा ने रबी सीजन में किसानों को हो रही डीएपी और यूरिया की समस्याओं को लेकर इस आंदोलन का आगाज किया था:
बारां से जयपुर कूच: आंदोलन की शुरुआत बारां जिले से हुई थी, जिसके बाद बुधवार सुबह समर्थकों का काफिला निवाई से जयपुर के लिए रवाना हुआ।
चाकसू में जनसभा: रास्ते में चाकसू पहुंचने पर एक बड़ी किसान सभा का आयोजन किया गया, जहां से सैकड़ों की संख्या में किसान जयपुर के लिए आगे बढ़े।
अवैध वसूली का आरोप: नरेश मीणा ने आरोप लगाया कि सोसायटियों और दुकानों पर किसानों को खाद देने के नाम पर महंगा और गैर-जरूरी सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
राजस्थान में रबी फसलों की बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में खाद की उपलब्धता मुख्य मुद्दा बनी हुई है:
दावे बनाम शिकायतें: राज्य सरकार और प्रशासन का दावा है कि प्रदेश में डीएपी और यूरिया का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। वहीं दूसरी ओर, कई जिलों में खाद की दुकानों के बाहर तड़के से ही किसानों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
बना बड़ा मुद्दा: सरकारी दावों और धरातल पर किसानों को हो रही परेशानियों के अंतर ने अब प्रदेश में एक बड़े किसान आंदोलन का रूप ले लिया है।