जिला परिषद सदस्यों के प्रत्याशी जिला मुख्यालयों पर तथा पंचायत समिति सदस्यों के प्रत्याशी उपखंड (एसडीएम) स्तर पर अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार पंचायतीराज चुनाव की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में संपन्न होगी:
नामांकन की समयसीमा: जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 13 अक्टूबर तय की गई है।
पंच और सरपंच का शेड्यूल: हालांकि चुनाव की अधिसूचना गुरुवार को ही जारी कर दी गई है, लेकिन प्रथम चरण के तहत पंच और सरपंच पद के प्रत्याशियों के लिए नामांकन प्रक्रिया 23 अक्टूबर से शुरू होगी।
चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा के साथ ही प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। इसके तहत कई पाबंदियां लागू की गई हैं:
मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों पर रोक: मंत्री और राजनीतिक पदधारक अब चुनावी क्षेत्रों में सरकारी वाहनों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। साथ ही सरकारी गेस्ट हाउस व डाक बंगलों में उनके ठहरने पर प्रतिबंध रहेगा।
तबादलों पर पूर्ण रोक: पंचायतीराज चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादलों पर रोक रहेगी।
नई योजनाओं की घोषणा नहीं: सरकार ऐसी किसी नई योजना, नीति या कार्यक्रम का ऐलान नहीं कर सकेगी जो मतदाताओं को प्रभावित करे। हालांकि, पहले से जारी विकास कार्य और प्रक्रियाधीन टेंडर यथावत चलते रहेंगे।
इन चुनावों के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण सरकार की नई तस्वीर साफ होगी, जिसमें महिलाओं की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की गई है:
1.69 लाख नए जनप्रतिनिधि: इन चुनावों में कुल 1.69 लाख नए पंचायतीराज प्रतिनिधि चुनकर आएंगे।
50 प्रतिशत महिला आरक्षण: पंचायतीराज व्यवस्था में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण के तहत 85 हजार से अधिक पदों पर महिलाएं काबिज होंगी।
सरपंच और प्रधान पद: प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में से करीब 7,200 महिला सरपंच और 65 हजार महिला वार्ड पंच बनेंगी। वहीं, 457 पंचायत समितियों में से 221 प्रधान पदों पर महिलाएं निर्वाचित होंगी।