प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 वर्षों के इस लंबे सफर को पीछे मुड़कर देखने पर उनके मन में उपलब्धियों से ज्यादा देश की 140 करोड़ जनता के प्रति कृतज्ञता का भाव आता है।
अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी भावुक नजर आए:
मिशन के लिए जीवन: पीएम मोदी ने कहा, "मैं महत्वाकांक्षा (अंबिशन) के लिए नहीं, बल्कि देश सेवा के एक मिशन के लिए जीने वाला इंसान हूं। जीवन के हर मोड़ पर आई घटनाओं ने मुझे सिखाया और विनम्र होना सिखाया। मैंने ईश्वर से हमेशा यही मांगा कि मेरे भीतर सीखने की इच्छा कभी कम न हो।"
गिराने वालों और विरोधियों का आभार: उन्होंने विरोधियों का जिक्र करते हुए कहा, "जिसने मुझे गिराया, उसी ने मुझे फिर से खड़ा होना सिखाया। जिन्होंने मेरा विरोध किया, उन्होंने ही मुझे लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति और उसके महत्व को समझाया है।"
प्रधानमंत्री ने देश सेवा को किसी भी राजनीतिक पद या सत्ता सुख से ऊपर बताया:
पुण्यभूमि का गौरव: उन्होंने कहा कि इस पवित्र राष्ट्र में जन्म लेना ही सबसे बड़ा एहसास और 'अमृत' के समान है। इसके सामने सत्ता का कोई भी सुख मायने नहीं रखता। पद और प्रतिष्ठा तो दुनिया में कहीं भी हासिल की जा सकती है, लेकिन भारत जैसी महान पुण्यभूमि दोबारा नहीं मिल सकती।
25 साल का सही आकलन: पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि उनके इन 25 सालों का मूल्यांकन इस बात से नहीं होना चाहिए कि 'मोदी कहाँ पहुँचा', बल्कि इस बात से होना चाहिए कि 'मेरा देश भारत कहाँ पहुँचा है'।
वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर जोर देते हुए उन्होंने देशवासियों का आह्वान किया:
नया आत्मविश्वास: पीएम ने कहा कि अर्थव्यवस्था को शीर्ष-3 में पहुंचाना हो, आत्मनिर्भर भारत का निर्माण हो या अंतरिक्ष में देश का परचम लहराना हो—हर क्षेत्र में 140 करोड़ देशवासी एक ही ऊर्जा के साथ कहेंगे, 'वी विल डू इट'।
निरंतर प्रयास का संकल्प: उन्होंने कहा कि यह समय रुकने या आराम करने का नहीं है, बल्कि नए उत्साह और समर्पण के साथ देश की तरक्की में जुटने का है।